Weather update : कड़ाके की ठंड के बीच पाले का अलर्ट, किसान ऐसे बचाएं अपनी फसल
मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड अपना असर दिखा रही है, जहां किसानों को भी अपनी फसल को बचाने की चिंता सताने लगती है। सर्दी के कारण फसलो पर पाला पडने की आशंका बढ जाती है।

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मध्यप्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिसके चलते आम जनजीवन अस्त व्यस्त नजर आ रहा है। इतना ही नहीं कड़ाके की ठंड का असर अब फसलों पर भी पड़ने लगा है। उधर, सर्दी का मौसम शुरू होते ही सबकेे सामने ठण्ड एक समस्या बन जाती है जब सर्दी अपने चरम सीमा पर होती है, उस वक्त किसानों को भी अपनी फसल को बचाने की चिंता सताने लगती है। जब वायु मण्डल का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम तथा 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो पाला पडता है। कडक सर्दी के कारण फसलो पर पाला पडने की आशंका बढ जाती है।

पाले से फसलों को बचाने के ये हैं उपाय
उप संचालक कृषि ने बताया कि, पाला पडने की संभावना होने पर पाले से बचाव के लिए फसलों में हल्की सिंचाई करे, अथवा थायो यूरिया की 500 ग्राम मात्रा का 1000 लीटर पाने में घोल बनाकर छिडकाव करें अथवा 8 से 10 किलोग्राम सल्फर पाउडर प्रति एकड का भुरकाव करें अथवा घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर अथवा 0.1 प्रतिशत् गंधक अम्ल का छिडकाव करें। पाले के बचाव के लिये खेत के चारो ओर मेड पर पेड- झाडियों की बाड लगा दी जाती है। इससे शीत लहर द्वारा होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। अगर खेत के चारो ओर मेड पर पेडो की कतार लगाना संभव न हो तो कम से कम उत्तर - पश्चिम दिशा में जरूर पेड की कतार लगानी चाहिए। जो अधिकतर इसी दिशा में आने वाली शीत लहर को रोकने का काम करेगी। खेतो मे मेडो पर घास-फूस जलाकर धुआ करे, इससे फसल का पाले से बचाव होता है। चना फसल फुल पर हो तो प्लानोफिक्स का 4.5 मिली प्रति पंप (15 लीटर) की दर से स्प्रे करे।

ठंड लगातार बढ़ती चली जा रही है
मध्य प्रदेश में ठंड लगातार बढ़ती चली जा रही है, जहां शीतलहर से अब फसलों को बचाने के लिए किसान जतन करते नजर आ रहे हैं। वहीं अब शासन प्रशासन भी किसानों के साथ फसल को बचाने के लिए लगातार प्रयास करता नजर आ रहा है, जिसके अंतर्गत कृषि विभाग के अधिकारी और एक्सपर्ट खेतों में जाकर किसानों को फसलों की सुरक्षा को लेकर टिप्स देते नजर आ रहे हैं। उप संचालक कृषि आर.पी. कनेरिया ने बताया कि, पाला रबी के मौसम में किसानों की एक प्रमुख समस्या होती है। इस मौसम में तापमान कम होने के साथ-साथ जैसे ही ठंड बढ़ती है और तापमान कम होते-होते जमाव बिन्दू तक आ जाता है, जिससे वातावरण में पाले की स्थिति बनने लगती है। प्रायः पाला पड़ने की संभावना उस रात में ज्यादा रहती है, जब दिन के समय ठंड अत्यधिक हो परन्तु आकाश साफ हो। भूमि के निकट का तापमान शून्य डिग्री सेन्टीग्रेड अथवा और भी कम हो। शाम के समय हवा अचानक रूक जाएं एवं हवा में नमी की अत्यधिक कमी हो।

लगातार बढ़ रहा सर्द हवाओं का प्रकोप
मध्य प्रदेश में लगातार सर्द हवाओं का कहर बढ़ता चला जा रहा है, जहां प्रदेश के मालवा निमाड़ अंचल में लगातार ठंडी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। लगातार बढ़ती चली जा रही ठिठुरन के चलते लोग अब घरों में ही कैद होने को मजबूर हैं। वहीं मालवा निमाड़ अंचल के इंदौर, उज्जैन, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और झाबुआ जैसे जिलों में ठंड का प्रकोप देखा जा रहा है। अंचल के कई जिलों में स्कूलों का टाइमिंग बदल दिया गया है तो वहीं कई जिलों में छुट्टी भी घोषित कर दी गई है। उधर, लगातार सर्द हवाओं की रफ्तार बढ़ने के कारण मौसम ठंडा हो चुका है, जहां लोग इस ठंड के मौसम से निजात पाने के लिए तरह-तरह की कवायद करते नजर आ रहे हैं।
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