MP news: किसान मानसून की बारिश के बाद ही लगाएं कपास और सोयाबीन की फसल, अभी से कर लें खास तैयारी
मानसून को अभी वक्त है, कृषकों को आगामी खरीफ, रबी और जायद में कौन-कौन सी फसलें लेना है, इसका अभी समय रहते नियोजन करें तथा फसलों के अधिकाधिक उत्पादन लेने हेतु प्रत्येक स्तर पर समेकित प्रबंधन करें।

मानसून में अभी वक्त है, जिससे पहले कृषकों को आगामी खरीफ, रबी और जायद में कौन-कौन सी फसलें लेना है, इसका अभी समय रहते नियोजन करें तथा फसलों के अधिकाधिक उत्पादन लेने हेतु प्रत्येक स्तर पर समेकित प्रबंधन करें। फसलों के नियोजन अनुसार लगने वाले प्राथमिक आदानों का प्रबंध कर लें। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर. आई. सिसोदिया ने बताया कि क्षेत्र के किसानों को अपने खेतों की गहरी जुताई कर खरीफ फसलों की तैयारी आरम्भ करें। उन्होंने बताया कि गहरी जुताई द्वारा भूमि में उपस्थित कीट व्याधियों की सुसुप्तावस्थाएँ एवं खरपतवार नष्ट होते हैं और फसल बोने के बाद इनसे फसल की सुरक्षा होती है।
समय रहते कीट-व्याधियों का उचित प्रबंधन करें
उन्होंने कृषकों से अपील की कि वे अभी से आने वाले समय के लिए कृषि आदानों विशेषकर आवश्यकतानुसार उच्च गुणवत्ता वाले फसलों के बीजों को विश्वसनीय विक्रेता या संस्था द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा किसान भाई खेतों का समतलीकरण, मेड बंदी, सिंचाई नालियों को दुरूस्त करा लें। मानसून की वर्षा प्रारंभ होने के पूर्व पची हुई गोबर खाद को खेतों में बिखेर दें। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम से कम रखने की जुगत करें तथा जैविक खेती को बढ़ावा दें। समय रहते कीट-व्याधियों का उचित प्रबंधन करें।
ये हैं ध्यान रखने योग्य बातें
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सिसोदिया ने बताया कि, परामर्श के लिए कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र पहुंचकर मार्गदर्शन कृषक बंधु ले सकते हैं। खरीफ की तैयारी के सन्दर्भ में सतीश परसाई, वरिष्ठ वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) ने विशेष तौर पर क्षेत्र/प्रदेश के कृषकों से अपील की कि वे मानसून की पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही सोयाबीन कपास आदि की फसल लगाऐं। उन्होंने कृषकों को सलाह दी कि वे शीघ्र या मध्यम अवधि में पकने वाली बी.टी. जातियों का ही चयन करें। उच्च गुणवत्ता वाली किसी भी बी.टी. कपास की प्रजाति को लगाऐं। उन्होंने कृषकों से आग्रह किया कि वे उन खेतों में इस वर्ष कपास न लगावें जहाँ गत वर्ष उन्होंने कपास लगाया था। परसाई ने कहा कि इन उपायों के अपनाने से आने वाले समय में फसल को कीट व्याधियों के प्रकोप से बचाने या उन्हें न्यूनतम स्तर पर रखने में मदद मिलेगी।
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