Diwali 2022 : मिट्टी के दीयों की बढ़ने लगी डिमांड, 2 साल बाद खिल उठे कारीगरों के चेहरे
कोरोना काल के बाद अबकी बार दिपावली पर्व का अलग उत्साह नजर आ रहा है, जहां इसी के चलते मिट्टी के दीपों की मांग भी अब बाजार में बढ़ने लगी है। वहीं दिपावली पर मिट्टी के दिपों की बढ़ी मांग के चलते अब कुम्हारों के चेहरे पर भी मुस्कान खिलती दिखाई दे रही है, आमतौर पर दीपावली पर लोग अपने अपने घरों में दीपक की सजावट करते हैं, जहां दीपावली पर दीपक लगाने का भी अपना अलग महत्व है। यही कारण है कि, दीपावली पर दीयों की डिमांड बढ़ जाती है, जहां अबकी बार चाइनीज दीपक से लोग तौबा करते हुए मिट्टी के दीपक सजाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।

चाइनीज दीपक हुए बंद
चाइनीज दीपक बंद हो जाने और कोरोना काल के बाद उत्साह के साथ दिवाली का पर्व मनाए जाने का प्रभाव मिट्टी के दीपक बनाने और बेचने वालों पर भी देखने मिल रहा है, जहां पिछले दों सालों के मुकाबले अबकी बार व्यापार में तेजी देखने मिल रही है। मिट्टी के दीपक की डिमांड लगातार बढ़ती चली जा रही है, यही कारण है की अब कुम्हारों के चेहरे पर भी मुस्कान खिल रही है। दो साल बाद अबकी बार दिपावली पर्व पर बढ़ते बाजार को लेकर कुम्हारों में भी उत्साह दिखाई दे रहा है।

कई महीनों पहले से शुरू हो जाता है निर्माण
दीपक बनाने वाले कारीगरों की मानें तो दीपक बनाने का काम कई माह पहले से ही शुरू हो जाता है, जहां दीपावली पर दीपक का व्यापार बढ़ता चला जाता है, जिसे देखते हुए कई माह पूर्व से ही दीपक को बनाने का काम शुरू कर दिया जाता है। अबकी बार दीपक की डिमांड इंदौर ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों से भी आने लगी है, जिसके चलते अबकी बार व्यापार अच्छा होने की संभावना जताई जा रही है। कोरोना काल के बाद के बाद लोगों में दीपावली पर्व को लेकर उत्साह है, जिसका सीधा असर अबकी बार दीपक के व्यापार पर भी देखने मिलेगा।

मिट्टी के दीपक लगाने की अपील
हर बार की तरह अबकी बार भी अलग - अलग सामाजिक संगठन और आमजन की ओर से मिट्टी के दीपक घरों में लगाने की अपील की जा रही है, जहां इसके पीछे का उद्देश्य मिट्टी के दीपक बनाने वाले कारीगरों को अच्छा खासा व्यापार दिलाना है, और मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा को जीवंत रखना भी है। हाल ही में मिट्टी के दीपक की जगह लोग चाइनीज दीपक का उपयोग करने लगे थे, लेकिन अब चाइनीज दीपक पर लगी पाबंदी के चलते एक बार फिर मिट्टी के दीपक लगाने की परंपरा जीवंत होगी।












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