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मरी हुई ललिता जिंदा लौटी! झाबुआ में डेढ़ साल बाद थाने पहुंची महिला, 5 बेगुनाह रिहा, पुलिस की चूक पर हाई कोर्ट

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के थांदला में एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां ललिता बाई, जिन्हें 14 सितंबर 2023 को मृत मानकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया था, मार्च 2025 में जिंदा थांदला थाने पहुंच गई। ललिता की कथित हत्या और बलात्कार के आरोप में पांच युवक-शाहरुख, इमरान, एजाज, सोनू, और अजीम-डेढ़ साल से झाबुआ जेल में बंद थे।

ललिता के जिंदा होने की पुष्टि के बाद मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया और पुलिस की लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई। यह मामला पुलिस जांच, शव की पहचान, और न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर खामियों को उजागर करता है।

Dead Lalita reached police station after one and a half years 5 accused released in Jhabua case

पूरा मामला विस्तार से

  • घटना: थांदला में पंचायत प्रतिनिधि प्रकाश कटारे को एक नाले में क्षत-विक्षत शव तैरता दिखा। शव की हालत बेहद खराब थी-चेहरा गायब, दोनों हाथ कटे, और शरीर बुरी तरह सड़ा हुआ।
  • पहचान: ललिता बाई (नावली गांव, मंदसौर) के माता-पिता और रिश्तेदारों ने शव को देखकर कद-काठी, कपड़ों, और अन्य निशानों (जैसे पैर में काला धागा) के आधार पर इसे ललिता माना।
  • पुलिस की चूक: थांदला पुलिस ने बिना डीएनए जांच के शव को ललिता का मान लिया और परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया, जिसमें 13वीं और गंगा में तर्पण जैसी रस्में शामिल थीं।

पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी

  • शाहरुख पर शक: जांच में पता चला कि ललिता की दोस्ती शाहरुख नामक युवक से थी, और वह आखिरी बार उसी के साथ देखी गई थी। पुलिस ने शाहरुख को हिरासत में लिया।
  • कथित कबूलनामा: पूछताछ में शाहरुख ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि 500 रुपये के विवाद में उसने अपने साथियों-इमरान, एजाज, सोनू, और अजीम-के साथ मिलकर लाठी-डंडों से ललिता की हत्या की और शव को नाले में फेंक दिया।
  • FIR और चार्जशीट: पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) (अब BNS) के तहत हत्या (धारा 302), बलात्कार (धारा 376), और साक्ष्य मिटाने (धारा 201) जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया। पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर झाबुआ जेल भेज दिया गया, और चार्जशीट दाखिल कर दी गई। केस अंतिम सुनवाई के दौर में था।

मार्च 2025: ललिता का जिंदा लौटना

  • थाने में हलचल: 11 मार्च 2025 को ललिता बाई अपने पिता रमेश नानूराम बाछड़ा के साथ गांधीसागर थाने (मंदसौर) पहुंची और बोली, "मैं जिंदा हूं!" उसने बताया कि वह मजदूरी के लिए बाहर गई थी और उसके साथ कोई अपराध नहीं हुआ।
  • पहचान की पुष्टि: ललिता ने आधार कार्ड, वोटर आईडी, और अन्य दस्तावेज दिखाए। पुलिस ने गांव वालों और परिजनों से पुष्टि की कि यह वही ललिता है। डीएनए टेस्ट ने भी साबित किया कि ललिता जिंदा है।
  • परिजनों का बयान: ललिता के माता-पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने शव की कद-काठी और कपड़ों के आधार पर गलत पहचान की थी। उन्हें अब अपनी भूल का पछतावा है।

ललिता की कहानी: अपहरण और मानव तस्करी

  • शाहरुख का अपहरण: ललिता ने पुलिस को बताया कि अगस्त 2023 में वह शाहरुख (भानपुरा निवासी) के साथ भानपुरा गई थी। दो दिन बाद शाहरुख ने उसे 5 लाख रुपये में कोटा (राजस्थान) के एक अन्य व्यक्ति (जिसका नाम भी शाहरुख था) को बेच दिया।
  • कोटा में बंधक: ललिता डेढ़ साल तक कोटा में बंधक रही। मौका मिलते ही वह भाग निकली और नावली गांव (मंदसौर) लौट आई। उसने बताया कि उसके पास मोबाइल फोन नहीं था, इसलिए वह परिवार से संपर्क नहीं कर पाई।
  • परिवार की खुशी: ललिता के दो बच्चे अपनी मां को जिंदा देखकर बेहद खुश हैं। परिवार में उत्सव का माहौल है।
  • आरोपियों की रिहाई: ललिता के जिंदा होने और डीएनए टेस्ट की पुष्टि के बाद मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने शाहरुख, इमरान, एजाज, सोनू, और अजीम को रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि हत्या और बलात्कार का कोई आधार नहीं है, क्योंकि पीड़िता जिंदा है।

पुलिस की लापरवाही: कोर्ट ने थांदला पुलिस की जांच पर सवाल उठाए:

  • डीएनए जांच न करना: शव की पहचान बिना वैज्ञानिक साक्ष्य के की गई।
  • जल्दबाजी: पुलिस ने शाहरुख के कथित कबूलनामे पर भरोसा कर लिया, बिना ठोस सबूतों के।
  • विवेचना में चूक: पुलिस ने शव की असली पहचान की जांच नहीं की, जिससे चार बेगुनाह (और संभवत: अजीम) जेल में रहे।
  • मानव तस्करी पर कार्रवाई: कोर्ट ने ललिता के अपहरण और मानव तस्करी के आरोपों की नई जांच का आदेश दिया। शाहरुख के खिलाफ मानव तस्करी (IPC/BNS धारा 370) और अपहरण (धारा 363) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बड़े सवाल और अनसुलझे रहस्य

  • शव किसका था?
  • क्षत-विक्षत शव की असली पहचान अभी तक नहीं हुई। पुलिस अब नए सिरे से जांच कर रही है कि वह महिला कौन थी और उसकी हत्या कैसे हुई।
  • थांदला पुलिस पर सवाल कि बिना डीएनए के शव की पहचान कैसे मान ली गई?
  • पुलिस की चूक कैसे हुई?
  • शाहरुख का कबूलनामा: क्या पुलिस ने जबरन कबूलनामा लिया, जैसा कि शाहरुख की बहन मुस्कान और मां कनिज बी ने दावा किया? उन्होंने कहा कि शाहरुख को मारपीट कर कबूलनामा करवाया गया।
  • सतही जांच: पुलिस ने CCTV, मोबाइल लोकेशन, या अन्य तकनीकी साक्ष्य का उपयोग क्यों नहीं किया?

आरोपियों का दर्द

  • इमरान, एजाज, सोनू, और अजीम के परिवारों ने आर्थिक तंगी और सामाजिक प्रताड़ना का सामना किया। शाहरुख की मां ने दावा किया कि 5 लाख रुपये खर्च हुए और घर गिरवी रखना पड़ा।
  • X पर चर्चा: कुछ यूजर्स ने इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ पुलिस की साजिश बताया, लेकिन यह दावा असत्यापित है।

मानव तस्करी का कोण

ललिता की कहानी मानव तस्करी की गंभीर समस्या को उजागर करती है। कोटा में दूसरे शाहरुख की भूमिका की जांच बाकी है।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

  • मंदसौर SP अभिषेक आनंद: "ललिता के जिंदा होने की पुष्टि के बाद थांदला पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।"
  • झाबुआ SP पद्मविलोचन शुक्ल: "कोर्ट ने मामले की पूरी जानकारी मांगी है। शव की असली पहचान और हत्या की जांच नए सिरे से होगी।"
  • गांधीसागर थाना प्रभारी तरुणा भारद्वाज: "ललिता ने 11 मार्च 2025 को थाने में अपनी पहचान दी। हमने गांव वालों और परिवार से पुष्टि की।"
  • पुलिस सुधार की जरूरत: यह मामला पुलिस जांच में वैज्ञानिक तरीकों (जैसे डीएनए, फोरेंसिक) की कमी को दर्शाता है। क्षत-विक्षत शवों की पहचान में डीएनए टेस्ट को अनिवार्य करने की मांग उठ रही है।

आरोपियों का पुनर्वास: पांच बेगुनाह डेढ़ साल जेल में रहे। उनके परिवारों ने आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेला। मुआवजे की मांग हो सकती है।

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