• search

CM योगी को गोरखपुर में थी हार की आशंका, इसलिए चुनाव लड़ने से कर दिया था इंकार

By Rahul Kumar
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की गोरखपुर सीट भाजपा के लिए हारना एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस सीट पर भाजपा 29 साल से राज कर रही थी, लेकिन योगी आदित्यनाथ के सीटे छोड़ते ही सीट भाजपा के हाथों से निकल गई। भाजपा के हाथों से सीट निकलने का अंदेशा योगी आदित्यनाथ को पहले से ही था। जिसके चलते वे यहां से इस्तीफा देने के बाद सीधे चुनाव लड़कर विधानसभा जाने के बजाए उन्होंने विधानपरिषद जाना अधिक मुफीद समझा। पिछले साल जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में मतदान के बाद गोरखपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था।

    गोरखपुर से एक मुख्यमंत्री उपचुनाव हार चुके हैं

    गोरखपुर से एक मुख्यमंत्री उपचुनाव हार चुके हैं

    इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, लोकसभा से इस्तीफा देने के बाद खुद योगी आदित्यननाथ ने अपनी इस इच्छा से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा दिया था कि वह उपचुनाव लड़ने की जगह सीधे उच्च सदन जाना पसंद करेंगे। तब योगी ने पार्टी नेतृत्व से साफ कहा था,'गोरखपुर से एक मुख्यमंत्री उपचुनाव हार चुके हैं। इस नाते वे उच्चसदन जाएंगे।' वहीं उसके लिए सीटें भी खाली पड़ती। इसलिए भी उन्होंने विधान परिषद में जाना अधिक सही समझा।

    त्रिभुवन नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने

    त्रिभुवन नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने

    योगी आदित्यनाथ द्वारा जाहिर की गई आशंका बुधवार को सही साबित हुई। दरअसल 1969 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सरकार बनी और चंद्रभानु गुप्ता मुख्यमंत्री बने। एक साल के अंदर उन्होंने सीएम पद की कुर्सी से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह चौधरी चरण सिंह सीएम बने लेकिन वह सात महीने ही टिक पाए। इसके बाद त्रिभुवन नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने। त्रिभुवन नारायण सिंह तब देश के पहले ऐसे शक्स थे, जो विधानसभा के किसी भी सदन का सदस्य हुए बगैर मुख्यमंत्री बने थे।

    त्रिभुवन नारायण सिंह उपचुनाव हार गए

    त्रिभुवन नारायण सिंह उपचुनाव हार गए

    1952 और 1962 लोकसभा के मेंबर रह चुके वाराणसी निवासी त्रिभुवन ने 18, अक्टूबर 1970 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। त्रिभुवन नारायण सिंह को सीएम बनने के बाद राज्य विधानसभा में चुना जाना था। इसलिए योगी आदित्यनाथ के गुरु दिवंगत महंत अवैद्यनाथ ने गोरखपुर की अपनी जीती हुई मनीराम सीट छोड़ दी। मार्च 1971 में उपचुनाव हुआ। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कांग्रेस प्रत्याशी राम कृष्ण दि्वेदी के पक्ष में जनसभा की। इसका असर यह हुआ कि त्रिभुवन नारायण सिंह उपचुनाव हार गए और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Yogi Adityanath told his party one chief minister has lost a by-election from Gorakhpur

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more