'हिंदी ने खत्म किया 25 भाषाओं को', स्टालिन के बयान पर भड़के योगेंद्र यादव, कहा- यह घटिया राजनीति
Yogendra Yadav News: हिंदी भाषा को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विवादित बयान दिया है। स्टालिन ने कहा, 'हिंदी ने कितनी भारतीय भाषाओं को निगल लिया है? एक अखंड हिंदी पहचान के लिए जोर देने से प्राचीन मातृभाषाएं खत्म हो रही हैं।' स्टालिन के इस बयान पर बवाल मचा हुआ है। वहीं, अब बीजेपी से लेकर स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने उन्हें इस मुद्दे पर घेरा है।
स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने हिंदी भाषा पर दिए तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बयान पर निराशा व्यक्त की है। योगेंद्र यादव ने अपने सोशल मीडिया X हैंडल पर लिखा, 'आप जैसे वरिष्ठ नेता की यह बात पढ़कर बहुत निराशा हुई। मैं पक्षपातपूर्ण गवर्नर, केंद्रीय अनुदान रोकने तथा किसी भी भाषा नीति को लागू करने के विरोध में आपके और तमिलनाडु के लोगों के साथ हूं।'

योगेंद्र यादव ने आगे लिखा कि केंद्र सरकार का विरोध, हिंदी का विरोध नहीं बनना चाहिए। यह बयान घटिया है, क्योंकि यह एक भाषा पर हमला करता है, न कि केवल उसके समर्थकों पर। तथ्यों के मामले में यह कमज़ोर है: सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं को कई पड़ोसी भाषाओं को शामिल करके 'मानकीकृत' किया गया है, उन्हें बोलियों के स्तर पर ला दिया गया है।
इन सभी भाषाओं को मान्यता देने का तर्क सही है, लेकिन सिर्फ़ हिंदी को दूसरी भाषाओं को 'निगलने' का दोषी ठहराना गलत है। इतना ही नहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि यह घटिया राजनीति है - हिंदी की इन "उप-भाषाओं" के बहुत कम वक्ता आपके इस कथन को पसंद करेंगे। हिंदी बनाम तमिल असली लड़ाई नहीं है।
भाषाएं (तमिल और हिंदी सहित) बनाम अंग्रेजी का आधिपत्य ही भारत में वास्तविक भाषाई रंगभेद है। आप एक महान और सबसे पुरानी भाषाओं में से एक के उत्तराधिकारी हैं, जो हिंदी से भी अधिक पुरानी है। आपसे बेहतर भाषाई संवेदनशीलता और संवेदनशीलता की उम्मीद है।
क्या कहा था स्टालिन ने?
दरअसल, एमके स्टालिन ने कहा था कि अन्य राज्यों के मेरे प्यारे बहनों और भाइयों, क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदी ने कितनी भारतीय भाषाओं को निगल लिया है? भोजपुरी, मैथिली, अवधी, ब्रज, बुंदेली, गढ़वाली, कुमाऊंनी, मगही, मारवाड़ी, मालवी, छत्तीसगढ़ी, संथाली, अंगिका, हो, खरिया, खोरठा, कुरमाली, कुरुख, मुंडारी और कई अन्य अब अस्तित्व के लिए हांफ रही हैं।
स्टालिन ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर आगे लिखा था कि एक अखंड हिंदी पहचान के लिए जोर देने से प्राचीन मातृभाषाएं खत्म हो रही हैं। यूपी और बिहार कभी भी सिर्फ़ "हिंदी के गढ़" नहीं थे। उनकी असली भाषाएं अब अतीत की निशानियां बन गई हैं। तमिलनाडु इसका विरोध करता है क्योंकि हम जानते हैं कि इसका अंत कहां होगा।
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