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किन डूबी हुई कंपनियों को लोन देकर डूब गया Yes Bank? जानिए

नई दिल्ली- यस बैंक के जमाकर्ताओं में आज हाहाकार मचा हुआ है। सरकार और आरबीआई उन्हें भरोसा दे रही है कि उनका पैसा सुरक्षित है, लेकिन लोग बैंकों-एटीएम में कतार लगाकर खड़े हैं। आरबीआई ने महीने में निकासी की सीमा 50 हजार रुपये मात्र तय कर दी है। जाहिर है कि इसी वजह से हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन, सरकार की मानें तो कुछ गिनी-चुनी कंपनियां और प्रभावी लोग ही इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं, जिन को बैंक ने आंख मूंद कर लोन दिया और वे सारे के सारे डिफॉल्टर साबित हो गए। जब कंपनियां डूब गईं तो वह यस बैंक का कर्ज कहां से चुकाएंगी, लिहाजा एक दिन ऐसा आया जब आरबीआई को सख्त कदम उठाने पड़ गए।

बैड लोन से यस बैंक का 'भट्ठा बैठ' गया

बैड लोन से यस बैंक का 'भट्ठा बैठ' गया

केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक से कहा है कि वह यह देखे कि यस बैंक का ऐसा हाल क्यों हो गया कि आखिरकार उसपर पाबंदियां लगाने पड़ीं। खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यस बैंक पर 2017 से ही निगरानी रखी जा रही थी और उसपर प्रतिदिन के हिसाब से नजर रखा जा रहा था। आरबीआई ने बैंक के प्रशासनिक मुद्दों और वित्तीय मसलों पर नियंत्रण रखने में कुछ खामियां नोटिस की थी। यह भी पाया कि बैंक ने लोन देते समय लोन लेने वाली कंपनियों की संपत्तियों की कीमतों का ठीक-ठीक आंकलन नहीं किया और बहुत ही जोखिम भरे लोन जारी करता चला गया। जब आरबीआई ने जोखिम भरे लोन जारी करने की बातें पाईं तो उसने प्रबंधन में बदलाव की सलाह दी थी। बता दें कि गुरुवार देर रात में आरबीआई ने यस बैंक के बोर्ड को भंग करके निकासी से संबिधित पाबंदियां लगा दी हैं।

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    यस बैंक को 5 डिफॉल्टर कंपनियों ने डुबो दिया!

    यस बैंक को 5 डिफॉल्टर कंपनियों ने डुबो दिया!

    वित्त मंत्री ने बताया है कि आरबीआई से कहा गया है कि वह पता लगाए कि समस्या की जड़ कहां है और उन लोगों की पहचान करे जो यस बैंक में वित्तीय संकट के जिम्मेदार हैं। जाहिर है कि लोन बांटने में भारी लापरवाही ने ही उसे डुबो दिया है। बैंक ने बिना गहराई से पड़ताल किए डिफॉल्टरों को दबाकर कर्ज बांटे और सारे के सारे बैड लोन में तब्दिल हो गए। इसके चेयरमैन ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए थे। बता दें कि यस बैंक के कर्जदारों में बड़ी नामी कंपनियां भी शामिल हैं और इन सब पर यस बैंक को डुबोने के आरोप लग रहे हैं। अनिल अंबानी ग्रुप, एस्सेल ग्रुप, आईएलएफएस, डीएचएफएल और वोडाफोन जैसी कंपनियों ने यस बैंक से लोन लिया था, जो डिफॉल्टर साबित हुए हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक ये सारे मामले 2014 के पहले के हैं। यस बैंक के लिए राहत की बात ये है कि एसबीआई ने उसमें निवेश की इच्छा जताई है। यस बैंक का 30 दिनों के भीतर री-स्ट्रक्चर किया जाएगा और ये स्कीम आरबीआई लेकर आया है। यस बैंक ने भी निवेश के लिए खूब हाथ-पैर मारे थे लेकिन, कुछ भी नहीं हो सका।

    कर्मचारी और जमाकर्ताओं के लिए बड़ी बात

    कर्मचारी और जमाकर्ताओं के लिए बड़ी बात

    हालांकि, इस दौरान सरकार ने यस बैंक के कर्मचारियों और जमाकर्ताओं को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि इनकी नौकरी और वेतन एक सालत तक सुरक्षित हैं और बैंक में जमाएं और देनदारियां भी अप्रभावित रहेंगी। बता दें कि गुरुवार को आरबीआई ने यस बैंक पर कई सारी पाबंदियां लगा दीं और तय कर दिया कि इसके ग्राहक महीने में 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं निकाल सकेंगे। हालांकि, शादी, बीमारी और शिक्षा जैसी आवश्कताओं के लिए इसमें छूट मिलेगी। इस दौरान यस बैंक अपने 20,000 कर्मचारियों को वेतन और किराया दे सकेगा। हालांकि, यस बैंक कोई नया लोन नहीं दे सकता या लोन को रिन्यू नहीं कर सकता या एडवांस भी नहीं दे सकता, न ही कोई निवेश कर सकता है, न ही किसी देनदारी को मंजूर कर सकता। इस बीच रिजर्व बैंक ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है और उनके हितों की पूरी रक्षा की जाएगी।

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