Year Ender 2024: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों और न्यायिक सक्रियता का साल, जानिए महत्वपूर्ण फैसले
Year Ender 2024: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2024 में कई ऐतिहासिक फैसलों के साथ न्यायिक सक्रियता का प्रदर्शन किया। इस वर्ष अदालत ने राजनीतिक, सामाजिक, और पर्यावरणीय मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। जो न केवल देश की न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ करते हैं। बल्कि नागरिकों के जीवन को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
देश की मुख्य घटनाएं और फैसले
1. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना बने नए मुख्य न्यायाधीश: 11 नवंबर को न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने अदालत की कार्यवाही को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मौखिक उल्लेख की प्रथा समाप्त की और बैकलॉग मामलों को कम करने की पहल की।

2. चुनावी बांड योजना का उन्मूलन: 15 फरवरी को अदालत ने राजनीतिक धन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चुनावी बांड योजना को रद्द कर दिया। इस फैसले ने राजनीतिक जवाबदेही को बढ़ावा देने और काले धन पर लगाम लगाने का मार्ग प्रशस्त किया।
3. धार्मिक स्थलों पर विवादों पर रोक: 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर अंतरिम या अंतिम निर्णय देने से रोक दिया। ज्ञानवापी, मथुरा, भोजशाला और संभल जैसे संवेदनशील मामलों में इस आदेश को ऐतिहासिक माना गया।
4. बुलडोजर न्याय के खिलाफ दिशानिर्देश: 13 नवंबर को अदालत ने बुलडोजर न्याय को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। अब किसी संपत्ति के विध्वंस से पहले कारण बताओ नोटिस और 15 दिनों की प्रतिक्रिया अवधि अनिवार्य कर दी गई है।
5. NEET-UG 2024 विवाद सुलझाया: 23 जुलाई को कदाचार के आरोपों के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय ने NEET-UG 2024 परीक्षा को मान्य घोषित किया। इस परीक्षा में 23 लाख मेडिकल छात्र शामिल हुए थे।
6. कॉर्पोरेट कानूनी लड़ाइयों में हस्तक्षेप: अदाणी समूह को शेयर मूल्य हेरफेर के आरोपों से राहत मिली। वेदांता लिमिटेड का थूथुकुड़ी संयंत्र फिर से खोलने का अनुरोध खारिज कर दिया गया। जेट एयरवेज को 7 नवंबर को परिसमापन के आदेश का सामना करना पड़ा।
7. जमानत के फैसलों में सुधार: सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि जमानत मानक होनी चाहिए और बिना मुकदमे के लंबे समय तक हिरासत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे राजनीतिक नेताओं को जमानत देकर इस दिशा में कदम उठाए गए।
8. संवैधानिक पीठ के फैसले: संविधान पीठ ने अनुसूचित जातियों में कोटा उप-वर्गीकरण और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की अल्पसंख्यक स्थिति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय दिए।
9. तिरुपति लड्डू विवाद: 18 अगस्त को तिरुपति लड्डू के अवयवों पर विवाद की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई।
10. डीएनडी फ्लाईवे टोल मुक्त: दिल्ली और नोएडा के बीच यात्रियों को राहत देते हुए डीएनडी फ्लाईवे को साल के अंत तक टोल मुक्त रखा गया।
अगले वर्ष के लिए चुनौतियां
सुप्रीम कोर्ट 2025 में भी कई प्रमुख मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगा। जिसमें वैवाहिक बलात्कार और नागरिकता संशोधन अधिनियम के संवैधानिक वैधता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
आगामी नेतृत्व परिवर्तन
13 मई 2025 को न्यायमूर्ति बीआर गवई मुख्य न्यायाधीश बनेंगे। 24 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति सूर्यकांत इस भूमिका को संभालेंगे।
न्यायिक सक्रियता की नई परिभाषा
सुप्रीम कोर्ट का 2024 का प्रदर्शन एक सक्रिय न्यायपालिका की मिसाल पेश करता है। अदालत के निर्णय न केवल संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हैं। बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करते हैं। 2024 को सुप्रीम कोर्ट के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील वर्ष के रूप में याद किया जाएगा।












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