'बागी' यशवंत सिन्हा के खुले खत ने मोदी सरकार की बेचैनी को बढ़ा दिया है, पढ़िए पूरी चिट्ठी

यशवंत सिन्हा ने कहा है, 'पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह से खत्‍म हो गया है। यहां तक कि पार्टी की संसदीय दल की बैठकों में भी उनको अपने विचार रखने का मौका नहीं मिलता

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    PM Modi को Yashwant Sinha ने लिखा Open Letter, BJP में मची खलबली | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। बीजेपी के बागी नेता और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यशवंत सिन्हा ने बीजेपी के सांसदो के नाम एक चिट्ठी में लिखा हैं 'Dear Friend, speak up' जिसमें उन्होंने बीजेपी सांसदों से पीएम मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने की अपील की हैं। जिसके लिए यशवंत सिन्हा ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी पीएम मोदी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की हैं। यशवंत सिन्हा ने कहा है, 'पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह से खत्‍म हो गया है। यहां तक कि पार्टी की संसदीय दल की बैठकों में भी उनको अपने विचार रखने का मौका नहीं मिलता।

    'राष्ट्र हित में आपको अपनी आवाज उठानी चाहिए'

    'राष्ट्र हित में आपको अपनी आवाज उठानी चाहिए'

    नोटबंदी से लेकर अर्थव्यवस्था तक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मुखर यशवंत सिन्हा ने 'इंडियन एक्सप्रेस' में एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने भाजपा सांसदों से मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। इससे पहले भी यशवंत सिन्हा अपने लेख के माध्यम से मोदी सरकार को घेर चुके हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सांसदों से अपील की है कि राष्ट्र हित में आपको अपनी आवाज उठानी चाहिए। खुशी की बात है कि पांच दलित सांसदों ने आवाज उठाई है। अगर अब खामोश रहेंगे तो राष्ट्र की आने वाली पाढ़ियां आपको माफ नहीं करेंगी। उन्होंने पार्टी के मूल्यों को बचाने के लिए आडवाणी और जोशी से भी स्टैंड लेने की अपील की है। यशवंत सिन्‍हा ने अपने पत्र में कई मुद्दों को उठाते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

    'वे बोलते हैं और आप सुनते हैं'

    'वे बोलते हैं और आप सुनते हैं'

    यशवंत सिन्हा ने कहा है, 'पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह से खत्‍म हो गया है। यहां तक कि पार्टी की संसदीय दल की बैठकों में भी उनको अपने विचार रखने का मौका नहीं मिलता। पार्टी की अन्‍य बैठकों में भी केवल एकतरफा संवाद होता है। वे बोलते हैं और आप सुनते हैं। प्रधानमंत्री के पास आपके लिए समय ही नहीं है। पार्टी हेडक्‍वार्टर कॉरपोरेट ऑफिस हो गया है और वहां पर सीईओ से मिलना नामुमकिन सा है। पिछले चार वर्षों में लोकतांत्रिक संस्‍थाओं का क्षरण हुआ है। संसद की कार्यवाही हास्‍यास्‍पद स्‍तर पर पहुंच गई है। संसद का बजट सत्र जब बाधित हो रहा था तो प्रधानमंत्री ने उस दौरान इसको सुचारू रूप से चलाने के लिए विपक्षी नेताओं के साथ एक भी बैठक नहीं की। उसके बाद दूसरों पर इसका ठीकरा फोड़ने के लिए उपवास पर बैठ गए। यदि इसकी तुलना अटल बिहारी वाजपेयी के दौर से की जाए तो उस दौरान हम लोगों को साफ निर्देश था कि विपक्ष के साथ सामंजस्‍य बनाकर सदन को सुचारू ढंग से चलाया जाना चाहिए।'

    'बैंकिंग प्रणाली में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार'

    'बैंकिंग प्रणाली में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार'

    देश में छोटे व्यापारी अपने व्यापार से हाथ धो बैठे हैं। पिछले चार सालों में देश के बैंकिंग प्रणाली में सबसे ज्याद भ्रष्टाचार पीएम मोदी के शासनकाल में ही हुआ हैं। सिन्हा ने कहा कि बड़े व्यापारी बैंकिंग प्रणाली का मजाक बनाकर देश के हजारों करोड़ो रूपये लेकर देश से चंपत हो जाते हैं और देश के रक्षक उन्हें रोकने की बजाय केवल उन्हें देश छोड़कर भागते हुए देखते रहते हैं।

     'महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ा है'

    'महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ा है'

    सिन्हा ने लिखा कि देश के भीतर आज जिस तरह का माहौल बन चुका है इसमें महिलाऐ खुद को महफूज नहीं समझती। सिन्हा ने पीएम मोदी के विदेश दौरों को लेकर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी विदेश की यात्राओं में व्यस्त हैं। और देश में आए दिन महिलाओं का रेप जैसी घटनाऐं सामने आ रही हैं। उन्होंने लिखा है, 'सरकार की विदेश नीति पर यदि नजर डाली जाए तो प्रधानमंत्री के लगातार विदेशी दौरों और विदेशी राजनेताओं के साथ गले लगने की तस्‍वीरें ही दिखती हैं। बेशक वह इसे पसंद या नापसंद करते हों लेकिन असल में इससे कुछ हासिल होता नहीं दिखता। हमारे पड़ोसियों के साथ रिश्‍ते मधुर नहीं हैं। चीन क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाता जा रहा है और हमारे हित प्रभावित हो रहे हैं। पाकिस्‍तान में हमारे बहादुर जवानों ने शानदार तरीके से सर्जिकल स्‍ट्राइक किया लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिला।

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