VIDEO: इको फ्रेंडली और प्राकृतिक तरीकों से पीने योग्य बनाया जा रहा यमुना और सीवर का पानी
VIDEO: इको फ्रेंडली तरीके से पीने योग्य हो रहा यमुना का पानी
नई दिल्ली, 16 अगस्त: यमुना नदीं दिल्ली के लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने का बड़ा स्त्रोत है लेकिन यमुना में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। दिल्ली में रॉ वाटर बड़ी समस्या है। यहां सीवर के पानी को साफ कर पीने के पानी में बदला जाता है। इसमें अहम रोल सुनील सिंघल और उनकी बेटी स्मिता की टॉयलेट टू टैब टेक्नॉलजी का है। जो एब्सोल्यूट वाटर के तहत इस काम को कर रहे हैं।

दिल्ली जल बोर्ड ने पश्चिमी दिल्ली के केशवपुर में सोलर बिजली से चलने वाला प्लांट लगाया है, ये हर रोज 1 लाख लीटर पोर्टेबल पानी तैयार करता है। साथ ही नदी को साफ करता है। सीवर के पानी को यहां फिल्टर की मदद से अलग करने के बाद पानी को रिसाइकिल किया जाता है। इसमें केंचुए अहम रोल निभाते हैं। केचुएं ही पानी से प्रदूषण को अलग कर देते हैं। ये टेक्नॉलजी प्राकृतिक है और इको फ्रेंडली है। एब्सेलूट वायर की निदेशक स्मिता सिंघल का कहना है कि इसमें बिजली कम लगती है और भारी उपकरणों की भी जरूरत नहीं होती।
एब्सेलूट वायर के प्लांटों में हर दिन सीवेज का 30 लाख लीटर पानी साफ होता है। ये दिल्ली से निकलने वाले का छोटा हिस्सा है लेकिन कंपनी को ये उम्मीद है कि आने वाले वक्त में एब्सेलूट वाटर के प्लांटों के जरिए 80 फीसदी आबादी की पानी की मांग पूरी हो जाएगी।












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