तेलंगाना के बाद दक्षिण के इस राज्य को साधने की तैयारी में कांग्रेस, भाई के खिलाफ बहन को उतारा
कांग्रेस पार्टी ने वाईएस शर्मिला रेड्डी को आंध्र प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह 4 जनवरी को ही कांग्रेस पार्टी में शामिल हुई थीं।
इसके साथ ही कांग्रेस ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले गिदुगु रुद्र राजू को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया है। कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार दोनों ही नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

वन इंडिया की खबर पर मुहर
वन इंडिया ने पिछले महीने ही यह रिपोर्ट दी थी कि वाईएस शर्मिला जनवरी में अपनी वाईएसआर तेलंगाना पार्टी का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं और उन्हें पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस का रुतबा वापस लौटाने का किया वादा
अपनी नियुक्ति के बाद वाईएस शर्मिला ने मंगलवार को कहा है कि वह आंध्र प्रदेश में पूरी प्रतिबद्धता और निष्ठा के साथ पार्टी को उसके पुराने गौरव फिर से दिलाने के लिए ईमानदारी से काम करेंगी।
अपनी नियुक्ति के लिए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल को शुक्रिया कहा है।
इसी पर उन्होंने लिखा है, 'मैं पूरी प्रतिबद्धता और ईमानदारी के साथ आंध्र प्रदेश में पार्टी के पुराने गौरव को फिर से बहाल करने के लिए पूरी ईमानदारी के साथ काम करने का वादा करती हूं।'
कार्यकर्ताओं के साथ चलकर कांग्रेस को फिर से जीवित करेंगी शर्मिला
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ कदम मिलाकर चलने की बात कही है और उनके लिए प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देकर रास्ता साफ करने वाले रुद्र राजू का भी सहयोग मांगा है।
कौन हैं वाईएस शर्मिला?
वाईएस शर्मिला संयुक्त आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता रहे वाईएस राजशेखर रेड्डी की बेटी हैं। वो आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी की बहन भी हैं।
शुरू में आंध्र प्रदेश की राजनीति में दोनों भाई-बहनों में तो किसी भी तरह का सियासी मतभेद नजर नहीं आया। शायद यही वजह है कि शर्मिला ने तेलंगाना की राजनीति पर फोकस किया था।
उन्होंने भी पिता के नाम पर ही पार्टी बनाई, लेकिन आंध्र प्रदेश से दूर थीं, ताकि भाई की राजनीति में किसी तरह से बाधा न बन जाएं। लेकिन, तथ्य यह है कि पड़ोसी राज्य में वह अपना सियासी सिक्का नहीं चला पाई। शर्मिला ने भाई और बहन के बीच मतभेद की बात पहली बार फरवरी, 2021 में कबूल की थी।
कर्नाटक, तेलंगाना के बाद आंध्र प्रदेश पर नजर
दरअसल, पिछले साल दिसंबर में ही पड़ोसी राज्य तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बनी है। कर्नाटक के बाद दूसरी सफलता ने कांग्रेस नेतृत्व का हौसला बहुत बढ़ा दिया है।
आंध्र प्रदेश में कुछ ही महीने में लोकसभा और विधानसभा दोनों के चुनाव होने हैं। पार्टी को लगता है कि भाई जगन की सरकार के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी का फायदा वह बहन को सामने रखकर उठा सकती है।
कांग्रेस की सियासी ताकत बहुत कमजोर हो चुकी है
वैसे शर्मिला को आंध्र प्रदेश में उस कांग्रेस को उठाने की जिम्मेदारी मिली है, जो राज्य के विभाजन के बाद चुनावी जमीन पर लगभग समाप्त नजर आती है।
2019 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन
मसलन, 2019 के विधानसभा चुनावों में पार्टी 175 सीटों में से 174 पर लड़ी और उसका एक भी उम्मीदवार तो नहीं ही जीता, वोट शेयर भी मात्र 1.17% रहा। जबकि, जगन रेड्डी की पार्टी ने 151 सीटें जीती और उसका वोट शेयर 49.95% रहा।
इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस का आंध्र प्रदेश में खाता नहीं खुला और वोट शेयर सिर्फ 1.3% रह गया। जबकि, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 22 सीटें मिलीं और उसने करीब 50% वोट हासिल कर लिए।












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