नहीं रहे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि कुंवर नारायण, 90 साल की उम्र में निधन
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि कुंवर नारायण सिंह का बुधवार सुबह अपने घर में निधन हो गया। पिछले 51 सालों से साहित्य में सक्रिय रहने वाले कुंवर नारायण 90 साल के थे।
नई दिल्ली। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि कुंवर नारायण सिंह का बुधवार सुबह अपने घर में निधन हो गया। पिछले 51 सालों से साहित्य में सक्रिय रहने वाले कुंवर नारायण 90 साल के थे। दिल्ली के सीआर पार्क में 15 नवंबर की सुबह उन्होंने अपनी आखिरी सांसें लीं।

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में 19 सितंबर, 1927 को जन्में कुंवर नारायण ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था। पढ़ाई के बाद वो परिवार के बिजनेस से जुड़ गए लेकिन ज्यादा समय तक उनका मन इसमें नहीं लगा। वो सत्यजीत रे, आचार्य नरेंद्र देव से काफी प्रभावित हुए और लेखनी में हाथ आजमाया।
उन्होंने अपनी पहली किताब साल 1956 में 'चक्रव्यूह' लिखी थी। उन्होंने अपने जीवन में कविता, कहानिया, निबंध, कला और सिनेमा, सभी पर लिखा। उनकी प्रमुख कृतियों में चक्रव्यू, तीसरा सप्तक, आत्मजयी, आकारों के आसपास और अपने-सामने शामिल हैं। इन रचनाओं के लिए कुंवर नारायण सिंह को कई सम्मान भी मिले हैं।
साल 1995 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। वहीं 2005 में उन्हें साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके साहित्य में योगदान के लिए भारत सरकार ने 2009 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
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