मन्नू भंडारी का निधन, 'आपका बंटी' की लेखिका ने 90 साल की उम्र में ली आखिरी सांस
मन्नू भंडारी का निधन,'आपका बंटी' की लेखिका ने 90 साल की उम्र में ली आखिरी सांस जैसी रचनाओं से बनाई थी अलग पहचान
नई दिल्ली, 15 नवंबर: हिंदी की मशहूर लेखिका और कथाकार मन्नू भंडारी का निधन हो गया है, वह 90 साल की थीं। 'आपका बंटी' जैसी अपनी रचनाओं के चलते हिंदी साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली मन्नू भंडारी ने आज आखिरी सांस ली। उनके निधन पर साहित्य जगत के लोगों ने गम का इजहार किया है और उनके जाने को एक अपूर्णीय क्षति बताया है।

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मन्नू भंडारी का जन्म मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा गांव में 3 अप्रैल, 1939 को हुआ था। भंडारी ने राजस्थान के अजमेर से हिंदी में एमए किया। इसके बाद वर्षों तक वह दिल्ली के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापिका रहीं। पढ़ाई के दौरान से ही उन्होंने लिखना भी शुरू कर दिया था। उनकी पहचान अपने लेखन के जरिए पुरुषवादी सोच पर चोट कर और महिलाओं के लिए आवाज उठाने वाली लेखिका की रही।
मन्नू भंडारी के उपन्यास आपका बंटी को हिंदी क्लासिक्स में शामिल किया जाता है। इस पर 'समय की धारा' नाम की फिल्म भी बनी थी। इस किताब का बांग्ला, अंग्रेजी और फ्रांसीसी में भी अनुवाद हुआ। उनकी कृति महाभोज' भी काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा 'एक प्लेट सैलाब', 'मैं हार गई', 'तीन निगाहों की एक तस्वीर', 'त्रिशंकु' 'आंखों देखा झूठ' इनके चर्चित कहानी संग्रह हैं। पति और जाने-माने लेखक राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया इनका उपन्यास एक इंच मुस्कान भी काफी चर्चित हुआ। मन्नू भंडारी ने चर्चित हिंदी लेखक और संपादक राजेंद्र यादव से शादी की थी। हालांकि लंबे साथ के बाद वो उनसे अलग हो गई थीं।
इसके अलावा उन्होंने टेलीवीजन के लिए भी कहानियां लिखी। जिसमें 'एक कहानी ये भी' काफी प्रचिलित रही। मशहूर हिंदी फिल्म 'रजनीगंधा' मन्नु भंडारी की रचना 'यही सच है' पर आधारित है। मन्नू भंडारी को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए शिखर सम्मान समेत कई बड़े अवॉर्ड मिले। उनको भारतीय भाषा परिषद कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कार मिले।












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