World Turtle Day: आखिर कैसे आसानी से 250 साल तक जिंदा रह लेते हैं कछुए?
हर साल 23 मई को विश्व कछुआ दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद कछुए के अवैध शिकार को रोकना है।

कछुए पृथ्वी पर रहने वाले शानदार जीव हैं, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इनके शिकार में तेजी आई है। इस वजह से हर साल 23 मई को विश्व कछुआ दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को इनके संरक्षण के बारे में जागरुक किया जा सके।
कछुआ पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत जरूरी है। एक कछुआ आराम से 100 से 250 साल के बीच जिंदा रह सकता है। अलडाबरा टोरटॉयज नाम के एक कछुए ने तो 256 साल तक जिंदा रहकर नया रिकॉर्ड बनाया। ऐसे में लोगों के मन में सवाल ये उठता है कि आखिर ये इतनी लंबी उम्र कैसे जी लेते हैं।
हाल ही में कछुओं की उम्र पर कई रिसर्च हुईं, जिसमें पता चला कि उनका डीएनए स्ट्रक्चर काफी अलग होता है। उनके जीन वेरिएंट काफी वक्त तक सेल के अंदर डीएनए की मरम्मत करते हैं। इस तरह से सेल की एंट्रोपी की समय सीमा काफी बढ़ जाती है।
अलडाबरा टोरटॉयज के मामले में वैज्ञानिकों ने पाया कि उसके शरीर के अंदर जीन वैरिएंट ने सेल्स को लंबे समय तक एंट्रॉपी तक जाने से बचाए रखा। इस वजह से उसके शरीर में कोई बीमारी नहीं हुई और वो 250 साल से ज्यादा जिंदा रहा।
वैसे सब कछुए 250 साल तक नहीं जीते हैं। ऐसा कुछ के साथ ही होता है। उनकी औसत आयु 100-150 साल तक होती है। हालांकि इनके अवैध शिकार ने कुछ प्रजातियों को मुश्किल में डाल दिया है। सरकार इनके संरक्षण के लिए कदम तो उठा रहीं, लेकिन वो नाकाफी हैं।
क्यों होती है तस्करी?
कुछ देशों में कछुए का मांस खाया जाता है, जिसमें चीन पहले नंबर पर है। तस्कर इनको पकड़कर मार देते हैं। इसके बाद मांस और खाल को अलग कर लेते हैं। मांस को लोग पकाकर खा जाते हैं, जबकि खाल को उबालकर सुखाया जाता है। इसे कैलिपी कहते हैं। कैलिपी से सूप और सेक्स पावर की दवाएं बनाई जाती हैं।












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