World No Tobacco Day 2021: तंबाकू,बीडी-सिगरेट पीने वालों को कोरोना का खतरा अधिक-डॉ. सूर्य कान्त

लखनऊ, 30 मई। विश्‍व भर में 31 मई को विश्‍व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्‍य लोगों को तम्बाकू के खतरों के प्रति सचेत करना है। इस बार तम्बाकू निषेध दिवस की थीम है- "तम्बाकू छोड़ने के लिए कटिबद्ध" है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष और स्टेट टोबैको कंट्रोल सेल के सदस्य डॉ. सूर्य कान्त ने बताया तंबाकू या बीड़ी-सिगरेट पीने वालों को कोविड-19 का खतरा सबसे अधिक है क्‍योंकि इसका सेवन करने वालों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो जाती है।

कोरोना से जान गंवाने वालों में बड़ी तादाद थी

कोरोना से जान गंवाने वालों में बड़ी तादाद थी

डॉक्‍टर सूर्यकांत ने बताया तंबाकू और बीड़ी-सिगरेट का सेवन करने से इम्यूनिटी इतनी कमजोर हो जाती है कि वह किसी भी वायरस से लड़ नहीं पाती और वायरस की शरीर में एंट्री हो जाती है। उन्‍होंने बताया कोरोना की चपेट में आकर अस्पतालों में भर्ती होने और जान गंवाने वालों में बड़ी तादाद उन लोगों की रही जो बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों का सेवन करते थे । ऐसे लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होने के साथ ही फेफड़े भी कमजोर हो चुके थे । इससे सांस लेने में उन्हें बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा और आक्सीजन तक का सहारा लेना पड़ा ।

धूम्रपान करने से आती है नपुंसकता

धूम्रपान करने से आती है नपुंसकता

डॉक्‍टर सूर्यकांत ने कहा युवा वर्ग जो आज महज दिखावे के चक्कर में सिगरेट के छल्ले उड़ाते है, उसको भी सतर्क हो जाने की जरूरत है क्योंकि यह कश उसको नपुंसक भी बनाता है । ध्रूमपान करने वाले युवाओं को यह जानना जरूरी है कि इसके चक्कर में वह नपुंसकता का शिकार हो रहे हैं। रिसर्च बताते हैं कि धूम्रपान सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके चलते नपुंसकता का शिकार बनने की सम्भावना बढ़ जाती है । इसके अलावा टीबी, कैंसर, ब्रानकाइटिस, ब्लड प्रेशर, पेट, दिल-दिमाग के साथ ही कई अन्य बीमारियों को यह तम्बाकू उत्पाद खुला निमंत्रण देते हैं ।

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    40 तरह के कैंसर व 25 अन्य बीमारियों का खतरा

    40 तरह के कैंसर व 25 अन्य बीमारियों का खतरा

    डॉक्‍टर सूर्यकांत का कहना है बीड़ी-सिगरेट पीने या अन्य किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन करने वालों को करीब 40 तरह के कैंसर और 25 अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की पूरी सम्भावना रहती है। इसमें मुंह व गले का कैंसर प्रमुख हैं। यही नहीं धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों तक तो करीब 30 फीसदी ही धुँआ पहुँचता है बाकी बाहर निकलने वाला करीब 70 फीसद धुँआ उन लोगों को प्रभावित करता है जो कि धूम्रपान करने वालों के आस-पास रहते हैं । यह धुँआ (सेकंड स्मोकिंग) सेहत के लिए और भी खतरनाक होता है ।

     करीब 12 लाख लोग की हर साल हो रही मौत

    करीब 12 लाख लोग की हर साल हो रही मौत

    डॉ. सूर्यकान्त ने बताया आज देश में हर साल तम्बाकू खाने व बीड़ी-सिगरेट पीने वाले करीब 12 लाख लोग यानि करीब तीन हजार लोगों की हर दिन इसकी वजह से मौत हो रही है। सरकार इन आंकड़ों को कम करने के लिए प्रयासरत है। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए सार्वजनिक स्थलों और स्कूलों के आस-पास बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक के लिए केंद्र सरकार वर्ष 2003 में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) ले आई है, जिस पर सख्ती से अमल की जरूरत है, तभी स्थिति में सुधार आ सकता है।

    बीड़ी-सिगरेट व तम्बाकू छोड़ने के फायदे

    बीड़ी-सिगरेट व तम्बाकू छोड़ने के फायदे

    डॉ. सूर्य कान्त का कहना है कि बीड़ी-सिगरेट व तम्बाकू छोड़ने के फायदे भी बहुत हैं । धूम्रपान बंद करने के 12 मिनट के भीतर उच्च हृदय गति और रक्तचाप में कमी आ सकती है । 12 घंटे बाद रक्त में मौजूद कार्बन मोनो आक्साइड सामान्य पर पहुँच जाएगा । दो से 12 हफ्ते में खून का प्रवाह और फेफड़ों की क्षमता बढ़ जायेगी । इस तरह जहाँ शरीर निरोगी रहता है वहीँ घर-परिवार की जमा पूँजी इलाज पर न खर्च होकर घर-परिवार को बेहतर माहौल प्रदान करने के काम आती है । कोरोना ने एक तरह से इस आपदा को कुछ मामलों में अवसर में भी बदलने का काम किया है ।

    कोरोना काल में सिगरेट पीने की दर में पहले से कमी आई है

    कोरोना काल में सिगरेट पीने की दर में पहले से कमी आई है

    डॉक्‍टर सूर्यकांत ने कहा ऐसा ही कुछ शुभ संकेत एक्शन ऑन स्मोकिंग एंड हेल्प संस्था के सर्वे से मिलता है । संस्था की गणना के अनुसार कोविड-19 के एक साल के दौरान दुनिया में करीब 10 लाख लोगों ने धूम्रपान त्‍याग दिया है। इसके अलावा करीब 5.50 लाख लोगों ने धूम्रपान छोड़ने की कोशिश की है और करीब 24 लाख लोगों में सिगरेट पीने की दर में पहले से कमी आई है । इसके पीछे कारण चूंकि पिछले एक साल से लोग घरों में अपने बच्चों और बड़ों के साथ रह रहे हैं, ऐसे में उनके लिहाज के चलते भी धूम्रपान से तौबा कर लिया हो। उत्तर प्रदेश सरकार के तम्बाकू नियंत्रण को लेकर किये गए प्रयासों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इस बार तम्बाकू निषेध दिवस पर सराहा है । यूपी स्टेट टोबैको कंट्रोल सेल द्वारा इस दिशा में किये जा रहे कार्यों में इससे और रफ़्तार आएगी ।

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