World Heritage Day: कैलाश मंदिर से लेकर अजंता की गुफाओं तक... ये हैं भारत में UNESCO द्वारा घोषित विश्व धरोहर
Unesco Heritage sites in India: भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर का दर्जा मिला हुआ है। इनमें कोणार्क सूर्य मंदिर से लेकर कैलाश मंदिर तक शामिल हैं।

World Hetitage Day: हर साल 18 अप्रैल के दिन वर्ल्ड हेरिटेज डे यानी विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। आने वाली पीढ़ी को इस दिन का महत्व समझाने के लिए इस दिन की अहमियत काफी होती है।
भारत की बात करें, तो हमारे देश में भी तमाम ऐसी धरोहरें हैं, जिन्हें यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। चलिये इसके बारे में आपको बताते हैं।
कैलाश मंदिर- ऐलोरा
हिंदू, बौद्ध और जैन गुफा मंदिरों और मठों में सबसे बड़ा है कैलाश मंदिर। इसे एलोरा गुफाओं के नाम से भी जाना जाता है। भले ही इसे आधिकारिक तौर पर दुनिया के सात अजूबों में घोषित ना किया गया हो, लेकिन एलोरा में कैलाश मंदिर की महानता को नकारा नहीं जा सकता। ये मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है।
महान जीवित चोल मंदिर
सबसे पहले बात करते हैं बृहदेश्वर मंदिर की, ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जो तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित है। 1000 साल से भी पुराने इस मंदिर में एक गर्भगृह भी है। दूसरा जीवित चोल मंदिर गंगाईकोण चोलपुरम है। इस मंदिर का निर्माण 1035 ईस्वी में राजेंद्र चोल 1 द्वारा किया गया था। इसके बाद आता है ऐरावतेश्वर मंदिर, जो तमिलनाडु के कुंभकोणम के पास दारासुरम में स्थित है।
अजंता की गुफाएं
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर लगभग 480 सीई तक की चट्टानों को काटकर बनाई गई 29 बौद्ध गुफा स्मारक हैं। अजंता का गुफाएं विश्व की धरोहर स्थल में शामिल हैं।
कोणार्क सूर्य मंदिर
ओडिशा में मौजूद ये मंदिर पूरी से 35 किलोमीटर की दूरी पर है। इसे साल 1984 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। बताते चलें कि इस मंदिर का निर्माण 1250ई. में गांग वंश राजा नरसिंहदेव प्रथम ने करवाया था। मुस्लिमों से जीत के बाद राजा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
महाबलीपुरम मंदिर
ये जगह चेन्नई से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। महाबलीपुरम को तमिलनाडु के सबसे फेमस और खूबसूरत शहरों में से एक भी माना जाता है। इस मंदिरको साल 1984 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर का भी दर्जा दिया था। जटिल नक्काशी और बड़े पत्थरों को काट कर बनाई गई गुफाओं वाला ये मंदिर एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है।
खजुराहो मंदिर
मध्यप्रदेश का खजुराहो मंदिर अपनी कामुक मूर्तियों के लिए मशहूर है। जो आज भी प्राचीनकाल के इतिहास की चीख-चीखकर गवाही देता है। 1000 साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर का नाम हिंदी शब्द खजूर से लिया गया है। इसका कारण इसका खजूरों से घिरा होना था। इसके अलावा इसे भगवान शिव के प्रतीकात्मक नाम के तौर पर भी लिया जाता है।












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