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World Consumer Rights Day: उपभोक्ता दिनस पर जानें भारत में एक ग्राहक के तौर पर आपको क्या-क्या अधिकार मिले हैं

World Consumer Rights Day: जानें भारत में एक ग्राहक के तौर पर आपको क्या-क्या अधिकार मिले हैं?

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2021: विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हर साल 15 मार्च दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिन को उपभोक्ता के अधिकारों और जरूरतों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। ताकी एख ग्राहक/उपभोक्ता अपने खिलाफ हुए धोखाधड़ी और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ सकें। अलग-अलग देशों में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस कई तरीकों से मनाया जाता है। ज्यादातर देशों में इस दिन लोगों को उनके अधिकारों के बारे में बताने के लिए जागरुकता अभियान चलाए जाते हैं, जगह-जगह कैम्प लगाए जाते हैं। इस दिन को ममाने के लिए हर साल एक अलग थीम का चुनाव किया जाता है। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2021 का थीम है "टैकल प्लास्टिक प्रदूषण" यानी प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ने के लिए सभी उपभोक्ताओं को इकट्ठा करना। तो आइए जानें विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का इतिहास और भारत में उपभोक्ताओं को क्या-क्या अधिकार मिले हैं?

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    World Consumer Rights Day: उपभोक्ताओं के क्या हैं अधिकार ? जानिए | वनइंडिया हिंदी
    जानिए क्या है विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का इतिहास

    जानिए क्या है विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का इतिहास

    विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस को मनाने का आइडिया संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी से प्रेरित था। 15 मार्च, 1962 को कैनेडी ने अमेरिकी कांग्रेस को एक संदेश भेजा था, जिसमें उन्होंने औपचारिक रूप से उपभोक्ता अधिकारों के मुद्दे को संबोधित किया था और उसके बारे में बताया था।

    उपभोक्ता आंदोलन पहली बार 1983 में तारीख पर शुरू हुआ। 9 अप्रैल 1985 को उपभोक्ता अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, जब संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता संरक्षण के लिए सामान्य दिशानिर्देशों को मंजूरी दी। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का उपयोग महत्वपूर्ण मुद्दों और अभियानों पर कार्रवाई करने के लिए किया जाता है।

    भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत 1966 में महाराष्ट्र से हुई थी। साल 1974 में पुणे में ग्राहक पंचायत की स्थापना के बाद, कई राज्यों में उपभोक्ता कल्याण के लिए संस्थाएं बनाई गईं और यह आंदोलन लगातार बढ़ता गया। 9 दिसंबर 1986 को, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद राष्ट्रव्यापी लागू हुआ।

    भारत में एक ग्राहक को क्या-क्या अधिकार मिले हैं?

    भारत में एक ग्राहक को क्या-क्या अधिकार मिले हैं?

    भारत में केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण कानून में कई बदलाव किए हैं। जिसके बाद भारत के ग्राहकों को पास और कई अधिकार आ गए हैं। इन बदलावों के बाद कंपनियों की अपने विज्ञापन के प्रति जवाबदेही बहुत ज्यादा बढ़ गई है। भारत में ग्राहक को क्या-क्या अधिकार हैं?

    - ग्राहक कहीं भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं: नए नियम के तहत, उपभोक्ता अब किसी भी आयोग (कमीशन) में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इससे पहले, उपभोक्ता केवल वहीं केस दर्ज करा सकते थे, जहां कंपनी की सर्विस उपलब्ध हो।

    -किसी भी प्रोड्क्ट के लिए विज्ञापनों में काम करने वाले कलाकार (सेलेब्रिटी) भी अब विज्ञापन को लेकर अधिक जवाबदेह हैं। अब भ्रामक विज्ञापनों के लिए मशहूर हस्तियों को सजा और जुर्माने का प्रावधान भी लागू किया गया है। ऐसे में अब सेलिब्रिटीज बहुत सोच समझकर विज्ञापन चुनते हैं।

    - उपभोक्ता कानून में बदलावों के तहत, ई-कॉमर्स कंपनियों (ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों) को भी उपभोक्ता फोरम के तहत लाया गया है। अब ऑनलाइन दुकानदारों को उत्पाद या सेवा के लिए ग्राहक देखभाल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, वे अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।

    जानिए भारत में उपभोक्ता कानून के तहत क्या है सजा?

    जानिए भारत में उपभोक्ता कानून के तहत क्या है सजा?

    - अब विक्रेता (दुकानदार/सेलर) भी इस कानून के दायरे में होगा। यदि कोई दुकानदार निर्धारित एमआरपी से अधिक पर सामान बेच रहा है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।

    - खाने-पीने की चीजों में मिलावट के लिए कंपनियों, जिम्मेदार व्यक्ति पर जुर्माना और जेल का प्रावधान है। मिलावट के मामले में 6 महीने की सजा, जबकि मिलावट के कारण ग्राहक की मौत पर उम्रकैद की सजा हो सकती

    - पहले अगर कोई प्रोडक्ट खराब निकलता था, तो दुकानदार को उसके लिए उस उत्पाद का हर्जाना ग्राहक को देता था। अब दुकानदार को खराब प्रोडक्ट के लिए नुकसान की कीमत का हर्जाना भरना पड़ता है। पहले जिला स्तर पर 20 लाख रुपये तक के मामले की सुनवाई होती थी और राज्य स्तर पर 1 करोड़ रुपये मामले की सुनवाई होती थी। कानून में बदलाव के बाद इसके अब इस राशि को बढ़ा दी गई है। अब जिला स्तर पर एक करोड़, राज्य स्तर 10 करोड़ रुपये तक के धन के मामलों की सुनवाई होती है। इससे अधिक राशि के मामले की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर की जाती है।

    नए कानून में बदलाव के बाद भारत में बढ़े ग्राहकों के अधिकार

    नए कानून में बदलाव के बाद भारत में बढ़े ग्राहकों के अधिकार

    - नए कानून में बदलाव के बाद अब उपभोक्ता फोरम ग्राहक और कंपनी के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पहले ऐसा नहीं था।

    - अब कोई भी ग्राहक चाहे तो सूचना के अधिकार के तहत किसी भी प्रोडक्ट की मात्रा,मूल्य, क्षमता, शुद्धता और गुणवत्ता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।

    - अगर किसी कंपनी के उत्पाद के खिलाफ अलग-अलग मामले कई जगहों पर दर्ज हैं, तो बड़ी कंपनियों को भारत में भी क्लास एक्शन सूट से डरना होगा।

    - कंपनी को अब ग्राहक की किसी भी समस्या या असुविधा का निवारण करना अनिवार्य कर दिया गया है।

    भारत में उपभोक्ता कानून के तहत किए गए ये भी बदलाव

    भारत में उपभोक्ता कानून के तहत किए गए ये भी बदलाव

    - कोई भी कंपनी ग्राहक को अपना उत्पाद खरीदारी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। जब तक ग्राहक आश्वस्त नहीं होता और वस्तु की जांच नहीं करता, तब तक उसे जबरन खरीदने के लिए नहीं कहा जा सकता।

    - अगर किसी भी उत्पाद का विज्ञापन कंपनी बढ़ा-चढ़ा कर दिखाती है या फिर गलत फैक्ट दिखाती है तो उसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत जेल हो सकती है।

    - नए उपभोक्ता कानून के तहत अगर कोई ग्राहक किसी भी उत्पाद की खरीद पर ठगा हुआ महसूस करता है तो वो इसके खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकता है।

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