वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान से कहा- मुद्दे को ICA में घसीटने के बजाय भारत के प्रस्ताव को करे स्वीकार
नई दिल्ली। वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को स्पष्ट कहा है कि किशनगंगा नदी का विवाद इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (ICA) में घसीटने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान के द डॉन की खबर के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान सरकार से कहा कि इस मामले में भारत के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय, पाकिस्तान जानबुझकर ICA में लाने की कोशिश ना करें। किशनगंगा नदी पर भारत ने एक बांध का निर्माण किया है, जिसको लेकर पाकिस्तान को आपत्ति है।

पाकिस्तान के विरोध की वजह...
पाकिस्तान ने किशनगंगा बांध को लेकर यह कहते हुए विरोध किया है कि यह सिंधु नदी से वॉटर शेरिंग पर वर्ल्ड बैंक मीडिएटर ट्रीटी का उल्लंघन है। वहीं, सिंधु नदी समझौता 1960 (IWT) नदी के ऊपर हाइड्रो प्रोजेक्ट बनाने की अनुमती देता है, जो ना तो नदी के जलमार्ग को बदलता है और नहीं इसके जलस्तर को कम करता है। हालांकि, इसके उलट पाकिस्तान का मानना है कि भारत ने किशनगंगा प्रोजेक्ट ना सिर्फ जलमार्ग के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह जल का स्तर भी कम करेगा।

इसलिए पाकिस्तान नहीं चाहता भारत का प्रस्ताव
पाकिस्तान चाहता है कि इस विवाद को ICA सुलझाए, जबकि भारत इस बांध के निर्माण को एक द्विपक्षीय मुद्दे की तरह देखता है, जो कुछ तटस्थ विशेषज्ञों द्वारा सुलझाया जा सकता है। अब विवाद इसलिए ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि पाकिस्तान चाहता है कि अगर भारत की तटस्थ विशेषज्ञों वाले प्रस्ताव को स्वीकार कर दिया तो मध्यस्थता के दरवाजे बंद तो होंगे ही, साथ ही इंटरनेशनल कोर्ट के सामने अपने विवाद उठाने के अधिकार को सरेंडर करने जैसा होगा।

सिंधु नदी समझौता के तहत पूरा किया काम
वर्ल्ड बैंक के प्रेसिडेंट ने दिसंबर 2016 में उस वक्त के पाकिस्तानी वित्त मंत्री इशाक डार को लेटर लिखकर कहा था कि इस मामले में दखल के लिए फिलहाल वे तैयार नहीं है और उन्होंने ICA चेयरमैन के साथ ही निष्पक्ष एक्सपर्ट की नियुक्ति की प्रक्रिया को रोकने का फैसला लिया है। जिसके बाद डार ने इसका कड़ा विरोध किया था। पाकिस्तान ने सालों तक इस बांध कि विरोध किया है, लेकिन भारत ने सिंधु नदी समझौता के अनुरूप अपना काम पूरा किया है।












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