Womens Reservation Bill: लोकसभा से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' दो-तिहाई बहुमत से पास होने के मायने?

Womens Reservation Bill Passed by Lok Sabha: बुधवार 20 सितंबर, 2023 को लोकसभा से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' विधेयक 2 के मुकाबले 454 वोटों से पारित होना कई मायनों में ऐतिहासिक है।

यह वही विधेयक है, जिसके पास कराने के लिए पहली कोशिश 27 साल पहले शुरू की गई थी। लेकिन, हर बार इसके खिलाफ संसद में बहुत ही अमर्यादित सीन देशवासियों ने देखी। लेकिन, मोदी सरकार न सिर्फ अचानक ये बिल निचले सदन में लेकर आई, बल्कि सर्वसम्मति से इसे विश्व के सबसे बड़े लोक सदन से पास कराने का प्रयास किया और उसमें वह काफी हद तक सफल भी रही।

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लोकसभा ने महिला आरक्षण बिल पास करके इतिहास रच दिया
543 सदस्यों वाली लोकसभा में सिर्फ दो सांसदों का इस विधेयक के खिलाफ मतदान करना कोई मायने नहीं रखता है। पूर्व में जिसकी पांच-पांच कोशिशें फेल हो चुकी हैं। सबसे खास बात ये है कि जो पार्टियां अबतक महिला आरक्षण को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को आतुर रहती थीं, उन्होंने भी इस बार इसके विरोध में वोटिंग नहीं की है। यह भारत की लगभग 70 करोड़ महिला शक्ति में पैदा हुए आत्मविश्वास और उनके सामर्थ्य का आईना है।

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान
इस विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। 21 सितंबर, 2023 यानी गुरुवार को यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि 2010 में एक महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा से पास हो चुका था, जो खत्म हो गया। क्योंकि, उसे तत्कालीन यूपीए सरकार में शामिल सहयोगी दलों सपा और राजद के भारी विरोध के चलते लोकसभा से पास नहीं कराया जा सका था।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए वरदान
देश की संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को कम से कम एक-तिहाई प्रतिनिधित्व मिलना, जागृत हो चुकी देश की नारी शक्ति के लिए बहुत बड़ा सम्मान है तो करीब 140 करोड़ की जनसंख्या वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

पंचायती राज में महिलाएं दिखा रही हैं अपना जलवा
अपना देश पंचायती राज के तहत गांवों और छोटे शहरों तक में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाए जाने का असर देख रहा है। महिलाएं घरों के चूल्हे-चौके से बाहर निकलकर गांवों और शहरों की व्यवस्थाएं बनाने में बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं।

देश और राज्यों के नीति-निर्धारण में बढ़ेगी महिलाओं की भूमिका
अब भारत की संसद और राज्य विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ने का मतलब होगा कि उस आबादी के विचारों को देश और इसके प्रांतों के नीति-निर्धारण में ज्यादा अहमियत मिलेगी। जो उनके हर तरह से सक्षम होने के बावजूद अबतक नहीं हो पाता था। अब देश कैसे चलेगा, इसमें उनकी एक प्रभावी भूमिका होगी या फिर वैसा रोल निभा पाएंगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर वीमेन-लेड डेवलपमेंट कहकर बुलाते हैं।

अपराधी प्रवृत्ति के नेताओं को रोकने में मिल सकती है मदद
देश की संसद और विधानसभाओं में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को रोक पाने में अबतक राजनेताओं ने कोई खास पहल तो नहीं ही की है, सुप्रीम कोर्ट भी इस दिशा में जमीनी स्तर पर कोई ठोस रास्ता नहीं दिखा पाया है। अगर महिला चुनाव क्षेत्रों की संख्या देश में एक-तिहाई हो जाती है, तो काफी हद तक अपराधी चरित्र के नेताओं की संसद और विधानसभाओं में एंट्री खुद ही कम होने की उम्मीद बढ़ सकती है।

सरकार की दूरदर्शिता और विपक्ष का सहयोग लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है
लोकसभा में जिस तरह से बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी विवाद के यह बिल पास हुआ है, उसमें मोदी सरकार की राजनीतिक दूरदर्शिता और उसका फ्लोर मैनेजमेंट वाकई दाद देने लायक है। साथ ही साथ चाहे जिन परिस्थितियों में विपक्ष ने इसका समर्थन किया हो, वह भी इतिहास में दर्ज हो चुका है।

हो सकता है कि देश में पिछले कुछ समय में राजनीति में जो एक बहुत बड़ी दरार पैदा हो गई थी, इस विधेयक ने उसकी खाई कम करने की एक बुनियाद तैयार कर दी है। बहरहाल, हमें राज्यसभा में सरकार के राजनीतिक कौशल और विपक्ष की सूझबूझ को देखने का इंतजार करना चाहिए। उम्मीद है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर जिस महिला अधिकार का श्रीगणेश हुआ है,उसका आखिरी अंजाम भी देशवासियों के लिए शुभ ही होगा।

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