Womens Reservation Bill: कैसे 'मंडल' दलों ने OBC कोटा पर मोदी सरकार के सामने कर दिया सरेंडर?

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक की ओर से बुधवार को साफ किया गया है कि गठबंधन में शामिल पार्टियां 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' विधेयक के समर्थन में मतदान करने के लिए सहमत हैं।

इंडिया टुडे डॉट इन के मुताबिक इसकी पुष्टि करते हुए आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा है कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं की बैठक में यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा है कि पार्टियों में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सहमति है और वे सरकार से मांग करेंगे कि इसे 2024 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाए।

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ओबीसी कोटा को लेकर ही पहले लटक जाता था महिला आरक्षण
गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक में शामिल कई दल ऐसे हैं, जिनकी वजह से मंगलवार तक 'महिला आरक्षण' का मसला, इतिहास की बात लगती थी। पहले के मौकों पर जिन दलों की वजह से यह बिल संसद में बार-बार लटकता रहा था, उसमें समाजवादी पार्टी (SP),राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड(JDU) जैसी पार्टियां प्रमुख हैं। देश ने संसद में इन दलों के सांसदों का इस बिल के खिलाफ बहुत ही आक्रमक और अप्रिय विरोध देखा है।

महिला आरक्षण के विरोध में नहीं इनमें से कोई भी दल
आज की तारीख में स्थिति ये है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया और अन्य विपक्षी दलों में से भी अधिकतर ने अपनी-अपनी राजनीति के हिसाब से ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और यहां तक कि मुस्लिम महिलाओं तक के लिए अलग से कोटा निर्धारित करने की मांग तो जरूर की है, लेकिन किसी ने ऐसा नहीं होने पर विरोध में वोटिंग करने की बात नहीं कही है।

सरकार ST-SC-OBC को अलग से कोटा नहीं देती है तो भी समर्थन- मायावती
सबसे पहले हम बीएसपी सुप्रीमो मायावती की लाइन लेते हैं। उन्होंने कहा है, "...और यदि इन सभी वर्गों की महिलाओं के आरक्षण के मामले में...यानी की एसटी-एससी और ओबीसी की महिलाओं के आरक्षण के मामले में मेरी इस अपील (अलग से आरक्षण देने) पर सरकार अमल नहीं करती है तो भी हमारी पार्टी इस बिल का इस खास बात को ध्यान में रखकर समर्थन करती है कि देश में पुरुषों की तुलना में सब समाज की महिलाएं अभी भी काफी पिछड़ी हुई हैं...."

इसे पास कराने में सरकार की मदद करेंगे- सपा
वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा है कि समाजवादी पार्टी की हमेशा से ही मांग रही है कि पिछड़े वर्ग की महिला और अल्पसंख्यक महिला को नारी शक्ति वंदन अधिनियम में जोड़ा जाए और इसमें उनको आरक्षण दिया जाए। इससे पहले पार्टी के राज्यसभा सांसद जावेद अली ईटी से कह चुके हैं, '....हालांकि हम इस बिल में बाधा नहीं डालने जा रहे हैं और इसे पास कराने में सरकार की मदद करेंगे।' उन्होंने कहा, 'एक बार वो पार्टियां जिनका लक्ष्य सामाजिक न्याय दिलाना है सत्ता में आ जाती हैं, हम इस आरक्षण में ओबीसी को शामिल करने के लिए इसे बदल देंगे।'

जेडीयू ने जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया
इसी तरह आरजेडी भी इस महिला आरक्षण बिल का विरोध करती नहीं दिखना चाहती और सूत्रों का कहना है कि इस बार आरजेडी भी इसे पास कराने में बाधा नहीं डालेगी। अलबत्ता, ओबीसी के लिए अलग से कोटा का मुद्दा जरूर उठा रही है। इसी तरह जेडीयू नेता और बिहार के सीएम नीतीश ने विधेयक का स्वागत किया है और एसटी और एससी महिलाओं की तरह ओबीसी और ईबीसी के लिए अलग से आरक्षण की मांग की और इसके लिए केंद्र से जातिगत जनगणना करवाने की भी मांग की है। लेकिन, यह नहीं कहा है कि उनकी मांगें नहीं माने जाने पर वे विधेयक को पास नहीं होने देंगे। जेएमएम ने तो मौजूद स्वरूप में ही बिल पास किए जाने का समर्थन किया है।

कांग्रेस ने भी की ओबीसी, एसटी और एससी महिलाओं को अलग से कोटा की मांग
इसी तरह इंडिया ब्लॉक में शामिल और दलों की ओर से भी ओबीसी आरक्षण का मुद्दा तो उठाया जा रहा है, लेकिन किसी ने इसके विरोध करने की बात नहीं कही है। सबसे चौंकाने वाला नजरिया तो कांग्रेस का सामने आया है। पार्टी नेता सोनिया गांधी ने भी ओबीसी, एसटी और एससी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की वकालत कर दी है।

एनडीए सरकार में शामिल अपना दल (सोनेलाल) की सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने ओबीसी कोटा को गंभीर मुद्दा बताया है। साथ ही उन्होंने सोनिया पर भी सवाल खड़े किए हैं कि अगर ओबीसी को कोटा देने की मांग को लेकर गंभीर थीं तो अपनी सरकार के समय में इसे क्यों छोड़ दिया था।

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1996 में जब देवगौड़ा सरकार ने यह विधेयक पेश किया था तो तब की बीजेपी सांसद उमा भारत ने ओबीसी महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने इस बार पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर यह विधेयक लाने पर खुशी जताई है और इतना भर कहा है कि उन्हें ओबीसी को आरक्षण मिलने की उम्मीद थी।

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