Womens Day: समाज की बेड़ियां तोड़ आसमान में उड़ान भरने वाली पायलट सिरशा राजू की कहानी...
Womens Day: "जब कोई कहता है कि सपने अपनी लिमिट में देखने चाहिए तब मैं मुस्कराते हुए अपने कॉकपीट की ओर देखती हूं और आसमान की ऊंचाई में उड़ जाती हूं। सपनों की कोई लिमिट नहीं होती।" ये विचार हैं सिरिशा राजू की जिन्होंने समाज की तमाम बेड़ियों को तोड़ कर अपने सपनों की उड़ान भरने में कामयाब रहीं।
सिरिशा के लिए ये अपने इस सपने को पूरा करना इतना आसान काम नहीं था उनके पायलट बनने के सपने को लोग हमेशा मजाक में लेते थे। जब वो 8 साल की थी तब उनकी आंटी ने NASA की तस्वीरें भेजी जिसे देखकर सिरिशा ने तय कर लिया की उन्हें पायलट ही बनना है।

Womens Day: गांव की लड़की का पायलट बनने की कहानी
सिरिशा राजू ओडिशा के एक छोटे से गांव से आती हैं जहां हवाई जहाज उड़ाना तो दूर लड़कियों का पढ़ना और काम करना अपने आप में एक चुनौती है। वो कहती हैं, 'जब मैं 8वीं कक्षा में थीं तब उड़ने का सपना देखा था, लेकिन मुझसे कहा गया अपनी सीमाओं को जानो। एक मिडिल क्लास परिवार से होने के कारण, लोगों ने कहा उड़ना इतना आसान नहीं है। लेकिन मेरे अंदर कुछ ऐसा था जो मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता था... मैं देखना चाहती थी कि आसमान से दुनिया कैसी दिखती है।'
सिरिशा स्कूल में कागज की प्लेन बनाती और खुद पायलट बनाती थी और उसे उड़ाती थीं। सिरिशा कहती हैं, मेरे पापा एक रेलवे कर्मचारी हैं और मां गृहिणी घर का खर्च निकाल पाना ही मुशिक्ल था ऐसे में पायलट बनने के लिए 40-50 लाख रुपए कहां से आते।
मैंने हार नहीं मानी और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करने का फैसला किया। मुझे पता था कि यही एक ऐसा रास्ता है जो मुझे जहाज के करीब ले जाएगा। मैंने दिन-रात पढ़ाई की और इंडिगो में इंटर्नशिप भी की। जब मैंने पहली बार एक दम करीब से हवाई जहाज देखा तो मुझे लगा जैसे मेरा सपना सच हो गया हो।
Womens Day: 6 साल का कठीन संघर्ष
अपनी इंटर्नशिप खत्म करने के बाद सिरिशा ने एयरपोर्ट के सामने एक स्टोर में कैशियर की नौकरी करने लगी इसके साथ ही अपने इंट्रेंस एग्जाम की तैयारी शुरु कर दी। फ्लाइंग स्कूल में दाखिला लेने के लिए सिरीशा ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरु कर दिया और पेंटिंग क्लास लेने लगी। इन 6 साल तक वो जो कुछ भी कमाती थी, फ्लाइंग स्कूल के फंड में डाल देती थी।
सितंबर 2023 में, मुझे एक एविएशन स्कूल में दाखिला मिल गया। मैं बहुत खुश था। और अपनी पहली उड़ान के दौरान, मैंने खिड़की से बाहर देखा और सब कुछ बहुत छोटा लग रहा था! मेरे सपनों को आखिरकार पंख लग गए।
वो कहती हैं, "हम समाज और उसकी सोच को नहीं बदल सकते हैं इसलिए हमें अपना रास्ता खुद तय करना होगा और अपने सपनें को पंख देना होगा।"












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