Women Reservation Bill: नई संसद में वोटिंग के लिए क्यों अपनाई गई पुरानी तकनीक? जानें लोकसभा अध्यक्ष की जुबानी
महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष के नेताओं और विपक्ष के बीच लंबी बहस के बाद बुधवार शाम नई संसद में दो तिहाई बहुमत से पास हो गया। इस दौरान बिल के पक्ष में 454 वोट पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ दो ही वोट आए। इसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव है। मतदान में समय लगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की जगह पुरानी तकनीक से वोट डाले गए।
इसके पीछे की वजह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बयां की। लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि नई संसद में नेताओं को अभी तक सीटें और प्रभाग आवंटित नहीं किए गए थे, जिससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग नहीं हो सकी। जिसके कारण वोटिंग मत पर्चियों द्वारा हुई। कैसे हुई वोटिंग?

बताया गया कि लोकसभा के सभी सदस्यों को पर्चियां दी गई। जिसमें एक हरी, लाल, और पीली थी। हरी यानी समर्थन, लाल यानी समर्थन नहीं और पीली अनुपस्थित रहना दर्शाता है। सदस्यों ने अपना नाम, आईडी नंबर, निर्वाचन क्षेत्र भरकर इन पर्चियों के इस्तेमाल से अपना मतदान किया। दो तिहाई बहुमत से महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद अब राज्यसभा में जाएगा। बाद में, यह कानून में हस्ताक्षरित होने के लिए भारत के राष्ट्रपति के पास जाएगा।
पीएम ने दी सभी सांसदों को बधाई, कहा- कानून महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा
आपको बता दें कि बीते दिन पीएम नरेंद्र मोदी सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था, जिसे औपचारिक रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 से जाना जाएगा। संसद के विशेष सत्र से पहले, सत्र के एजेंडे पर अनिश्चितता के बीच, विभिन्न दलों ने विधेयक को पारित करने का आह्वान किया था, जिससे लोकसभा में लगभग सर्वसम्मत समर्थन के साथ इसके पारित होने का मंच तैयार हो गया। अब महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पार्टियों के सांसदों को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कानून महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा।












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