Women Reservation Bill : 'चोली के पीछे क्या है', कौन हैं Shatabdi Roy, जिन्होंने दिया संसद में विवादित बयान?
Shatabdi Roy on Women Reservation Bill: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद शताब्दी रॉय ने संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने बयान में उन्होंने फिल्मी गानों का उदाहरण देते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए और कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है, न कि वास्तविक सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'चोली के पीछे क्या है?' 'चुंदरी के नीचे क्या है?'
उन्होंने जिक्र करते हुए कहा कि 'जिस तरह इन गानों में छिपी बात जानने की जिज्ञासा होती है, उसी तरह महिला आरक्षण बिल के पीछे भी असली एजेंडा छिपा हुआ है।'उन्होंने आरोप लगाया कि 'महिला आरक्षण बिल 2023 को 2023 में सभी दलों के समर्थन से पारित कर दिया गया था।'

'लेकिन इसे लागू करने में देरी जानबूझकर की जा रही है। इस बिल के पीछे असल में परिसीमन की प्रक्रिया जुड़ी हुई है। सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर लागू करने में टालमटोल कर रही है, जबकि अगर नीयत साफ है तो मौजूदा व्यवस्था में ही आरक्षण दिया जा सकता है। अगर नारी शक्ति का इतना ही सम्मान है, तो अभी आरक्षण लागू कर दीजिए। इसे भविष्य के परिसीमन से क्यों जोड़ रहे हैं?'
'महिला आरक्षण बिल पर सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही'
उन्होंने आरोप लगाया कि 'सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है और महिला सम्मान का दिखावा कर रही है। आपके आधे सांसद रेप केस में हैं और आधे दहेज के मामलों में फंसे हुए हैं। ऐसे में आप महिलाओं के सम्मान की बात कैसे कर सकते हैं?'

'ममता बनर्जी बिना किसी आरक्षण के मुख्यमंत्री बनीं'
रॉय ने ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि 'वे बिना किसी आरक्षण के अपने दम पर मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को किसी रिजर्वेशन की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने संघर्ष करके अपनी पहचान बनाई, और हम भी उसी परंपरा से आते हैं।' हालांकि उनके इस बयान ने सदन में काफी हंगामा भी मचा।
बीजेपी बंगाल चुनाव हारेगी, हारेगी, हारेगी- शताब्दी रॉय
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 'संसद का विशेष सत्र ऐसे समय में बुलाया गया ताकि विपक्ष को असहज किया जा सके। हम जानते थे कि हमें डिस्टर्ब किया जाएगा, फिर भी हम चुनाव छोड़कर यहां आए हैं लेकिन मैं दावा करती हूं कि बीजेपी बंगाल चुनाव हारेगी, हारेगी, हारेगी।'

'ये लोग गंदी और ओछी हरकत खुद करते हैं', शताब्दी रॉय पर भड़के लोग
हालांकि शताब्दी रॉय अपने इस बयान के कारण लोगों के निशाने पर आ गईं, सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है और कहा कि 'ये लोग गंदी और ओछी हरकत खुद करते हैं और बाद में सरकार पर सवाल खड़े करते हैं। एक महिला होकर संसद में इस तरह की बातें करना क्या शर्मनाक नहीं है?'
कौन हैं शताब्दी रॉय?
शताब्दी रॉय भारतीय सिनेमा (विशेषकर बंगाली फिल्म उद्योग) और राजनीति का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर दोनों ही क्षेत्रों में गहरी छाप छोड़ी है। 5 अक्टूबर 1969 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मीं शताब्दी रॉय ने 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक में कमर्शियल बंगाली सिनेमा पर राज किया।

प्रसेनजीत चटर्जी के साथ हिट रही जोड़ी
उनकी पहली फिल्म 'आतंक' (1986) थी, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध निर्देशक तपन सिन्हा ने किया था। हालांकि, उन्हें असली पहचान फिल्म 'अमर संगे' (1987) से मिली, जिसमें उन्होंने प्रसेनजीत चटर्जी के साथ काम किया था। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और यहाँ से प्रसेनजीत-शताब्दी की जोड़ी ने बंगाली सिनेमा पर राज करना शुरू किया। उन्होंने 'अपोन अमर अपोन', 'अंजलि', 'श्रद्धांजलि', और 'लाठी' जैसी सैकड़ों फिल्मों में काम किया।
2009 से तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद हैं शताब्दी रॉय
वह 2009 से तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद हैं। 2014, 2019 और 2024 में भी, उन्होंने इसी निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर दोबारा जीत हासिल की। 2025 में, उन्हें लोकसभा में अपनी पार्टी का उप-नेता घोषित किया गया।














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