Delimitation Bill: 'परिसीमन राजनीतिक नोटबंदी साबित होगा', PM मोदी पर भड़के शशि थरूर, Video

Delimitation Bill: संसद के विशेष सत्र के दौरान शशि थरूर ने महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल पर जमकर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना, असल में भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को हमारे इतिहास की सबसे विवादित राजनीतिक प्रक्रियाओं में से एक का बंधक बना देना है।'

उन्होंने कहा कि 'भविष्य के परिसीमन में जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने में सफलता नहीं पाई है, उन्हें ज़्यादा राजनीतिक महत्व देकर पुरस्कृत किया जाएगा। हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हम यही संदेश देना चाहते हैं कि बेहतर शासन का नतीजा राजनीतिक रूप से महत्वहीन हो जाना है,आपने परिसीमन का प्रस्ताव इतनी जल्दबाजी में रखा है।'

Shashi Tharoor

'वैसी ही जल्दबाजी जैसी आपने नोटबंदी के समय दिखाई थी। दुर्भाग्य से, हम सभी जानते हैं कि उससे देश को कितना नुकसान हुआ था, महोदय, परिसीमन भी एक तरह की 'राजनीतिक नोटबंदी' ही साबित होगा। ऐसा मत कीजिए।'

'परिसीमन राजनीतिक नोटबंदी साबित होगा'

उन्होंने स्वीकार किया कि 'महिला आरक्षण के पक्ष में लगभग सर्वसम्मत राजनीतिक सहमति है। थरूर के अनुसार हर प्रमुख दल यह महसूस करता है कि प्रतीकात्मकता का समय समाप्त हो गया है और सामूहिक साझेदारी का युग शुरू होना चाहिए, प्रधानमंत्री 'नारी शक्ति' को न्याय का उपहार प्रदान करने की बात करते हैं, लेकिन उन्होंने यह उपहार 'कांटेदार तार में लपेट दिया है।'

शशि थरूर के संबोधन की खास बातें

  • थरूर का आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश कर रही है।
  • सीटों का पुनर्निर्धारण ऐसे क्षेत्रों में बढ़ाया जा सकता है जहां सत्तारूढ़ दल मजबूत है, जबकि कमजोर क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
  • महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भी गलत है और इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए, न कि भविष्य के किसी प्रक्रिया से बांधा जाए।
  • शशि थरूर ने कहा कि' जैसे नोटबंदी में अचानक पुराने नोटों की वैल्यू खत्म हो गई थी, वैसे ही परिसीमन के जरिए कुछ क्षेत्रों की राजनीतिक ताकत कम या ज्यादा की जा सकती है।'

क्या है परिसीमन बिल?

भारत में परिसीमन का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस का विषय रहा है। हाल ही में महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई है, क्योंकि महिला आरक्षण का लागू होना 'नए परिसीमन' पर निर्भर है। परिसीमन का सीधा अर्थ है 'सीमा निर्धारण'। इसके तहत देश की जनसंख्या में हुए बदलावों को देखते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय किया जाता है।इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि "एक वोट, एक मूल्य" का सिद्धांत बना रहे, यानी प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग समान जनसंख्या हो ताकि प्रतिनिधित्व निष्पक्ष रहे।गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत केंद्र सरकार हर जनगणना के बाद एक 'परिसीमन आयोग' का गठन करती है।

परिसीमन बिल पर बवाल क्यों मचा है?

परिसीमन को लेकर मचे बवाल के पीछे मुख्य रूप से क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रभाव का डर है इसी वजह से दक्षिण के राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) ने पिछले दशकों में जनसंख्या नियंत्रण के सरकारी कार्यक्रमों को बखूबी लागू किया है।

'अच्छा काम करने की सजा', दक्षिण के राज्यों ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

इसके विपरीत, उत्तर भारतीय राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान) की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है लेकिन अब इन्हें डर सता रहा है कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाई गईं, तो उत्तर भारत की सीटें काफी बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत की सीटों का अनुपात कम हो जाएगा। दक्षिण के राज्यों का मानना है कि उन्हें अच्छा काम करने की सजा मिल रही है।

यह पढ़ें: Harivansh Narayan Singh: 'पत्रकार,मीडिया सलाहकार फिर बने नेता', कौन हैं हरिवंश सिंह जो तीसरी बार बने उपसभापति?
यह पढ़ें: Harivansh Narayan Singh: 'पत्रकार,मीडिया सलाहकार फिर बने नेता', कौन हैं हरिवंश सिंह जो तीसरी बार बने उपसभापति?
 यह पढ़ें: Parliament Session LIVE: महिला आरक्षण बिल को पीएम मोदी ने कंटीले तारों में लपेट दिया- थरूर
यह पढ़ें: Parliament Session LIVE: महिला आरक्षण बिल को पीएम मोदी ने कंटीले तारों में लपेट दिया- थरूर
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+