बजट बनाने में महिलाओं का रहा ज्यादा योगदान, 52 फीसदी काम संभाला
महत्वपूर्ण मंत्रालयों जैसे मानव संसाधन, कौशल विकास, वित्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और खेल के वित्तीय सलाहकारों ने बजट पूर्व प्रक्रिया में भारी योगदान दिया है।
नई दिल्ली। महिलाएं अब हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। जी हां इस साल बजट बनाने की प्रक्रिया में महिला अधिकारियों ने पहले से कहीं ज्यादा योगदान दिया है। एक इंग्लिश वेबसाइट के मुताबिक बजट बनाने की प्रक्रिया में जुटे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों में 41 फीसदी महिलाएं रही हैं। ये महिला अधिकारी सरकार के कुल बजट संबंधित कार्य के 52 फीसदी भाग को संभाल रही हैं।

वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों तथा विभागों में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव स्तर के 34 वित्तीय सलाहकारों में 14 महिला अधिकारी हैं। सूत्रों के मुताबिक महत्वपूर्ण मंत्रालयों जैसे मानव संसाधन, कौशल विकास, वित्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और खेल के वित्तीय सलाहकारों ने बजट पूर्व प्रक्रिया में भारी योगदान दिया है। इसके अलावा नागर विमानन, शहरी विकास, रसायन एवं उर्वरक, कोयला एवं खान, डाक, सामाजिक न्याय, विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान मंत्रालय के अधिकारी बजट प्रक्रिया में शामिल रहे हैं।
बजट में हो सकता है ये बड़ा ऐलान
अनुमान है कि इस साल बजट में कर योग्य आमदनी की निचली सीमा यानी स्लैब ढ़ाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख या फिर साढ़े तीन लाख रुपये तक किया जा सकता है। ऐसा हुआ तो हर स्लैब में आयकर चुकाने वाले को 5 हजार एक सौ पचास रुपये से 10 हजार तीन सौ रुपये तक की बचत हो सकती है।
देश में व्यक्तिगत आयकर देने वालों की संख्या 3.65 करोड़ है। जबकि 1.71 करोड़ से ज्यादा ऐसे हैं जो औसतन 26 हजार रुपये ही टैक्स देते हैं। मतलब ये हुआ कि इन 1.71 करोड़ करदाताओं को बीस से 40 फीसदी की बचत होगी। हालांकि ऐसा नहीं लगता कि दस लाख से ऊपर तीस फीसदी वाले स्लैब में कोई बदलाव होगा। इसके बावजूद बजट में अन्य प्रावधानों में करदाताओं के लिए राहत का इंतजाम किया जा सकता है।












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