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पांच माह बाद मस्‍कट से देश आईं हैदराबाद की कुलसुम बानू तो सुषमा को कहा थैंक्‍यू

हैदराबाद। हैदराबाद की रहने वाली कुलसुम बानू इन दिनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा कर रही हैं। कुलसुम को पांच माह के बाद ओमान की राजधानी मस्‍कट से बचाकर देश वापस लाया जा सका है। कुलसुम को नौकरी का लालच देकर ओमान ले जाया गया था। कुलसुम बानू की मानें तो वह विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज की अहसानमंद है जो उन्‍होंने उनकी मदद की और उनकी जान बच सकी। कुलसुम की ही तरह हैदराबाद की एक और महिला इस समय सऊदी अरब में फंसी हुई है और उसकी बहन ने भी सुषमा ने मदद की मांग की है।

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दूतावास ने अदा किया जुर्माना

कुलसुम ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, 'मेरी बेटी ने इस मामले की शिकायत एक चिट्ठी के जरिए विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से की थी। इसके बाद भारतीय दूतावास की ओर से करीब 5,000 रियाल का जुर्माना अदा किया जो मुझ पर लगाया गया था और इसके बाद मैं भारत वापस आ सकी।' कुलसुम के मुताबिक वह आठ मई को हैदराबाद पहुंची है और इसमें सुषमा ने उनकी मदद की। इसके अलावा ओमान में भारतीय दूतावास की ओर से भी सहायता की गई। कुलसुम ने अपने बयान में आगे कहा, 'मैं विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज और ओमान में भारतीय दूतावास की शुक्रगुजार हूं।'कुलसुम बानू को याद है कि उन्‍हें कैसे नौकरी का लालच देकर ओमान भेजा गया था। बानू ने बताया कि वह नौकरी तलाश कर रही थी। इसके बाद एक एजेंट अबरार ने उनसे संपर्क किया और उन्‍हें पार्लर में ब्‍यूटीशियन की नौकरी का ऑफर दिया।

ब्‍यूटीशियन की जगह नौकरानी का काम

अबरार ने उनसे कहा कि मस्‍कट में 30,000 की सैलरी पर उन्‍हें यह जॉब मिल सकेगी। कुलसुम ने इस ऑफर को स्‍वीकार कर लिया और फिर 17 दिसंबर 2018 को मस्‍कट चली गईं। यहां पहुंचने के बाद उन्‍हें अहसास हुआ कि वहां पर ब्‍यूटीशियन की कोई जॉब ही नहीं है। उनके इंप्‍लॉयर्स ने उन्‍हें घर की मेड के तौर पर काम पर रखा। एक महीने तक उन्‍होंने वहां पर काम किया और फिर उन्‍होंने मना कर दिया कि वह यह काम नहीं करेंगी। इसके बाद बानू को मस्‍कट में एक लोकल एजेंट को सौंप दिया गया जो उन्‍हें अपने घर ले गया। इसके बाद बानू को एक कमरे में बंद कर दिया गया और 10 दिनों तक उन्‍हें खाने को भी नहीं दिया गया। सिर्फ इतना ही नहीं लोकल एजेंट ने बानू को कई बार पीटा भी। बानू ने इसके बाद भारतीय दूतावास से संपर्क साधा। अधिकारियों ने उन्‍हें चार माह तक दूतावास में रखा। यहां पर बानू ने अपनी बेटी से संपर्क किया और उसे सारी समस्‍या बताई।

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