जब सुप्रीम कोर्ट में महिला खुद ही बन गई वकील, जबरदस्त बहस से खुश जज ने लिया ये फैसला

नई दिल्ली, 31 जुलाई। देश की पुलिस व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर अक्सर लोग सवाल खड़े करते हैं, लोग अलग-अलग तरह के आरोप लगाते हैं, कोर्ट के चक्कर लगाने से हर कोई बचना चाहता है। लेकिन कहते हैं कि अगर आप के भीतर संकल्प हो और हालात से डटकर लड़ने की हिम्मत हो तो आप किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहां पैसे की कमी की वजह से महिला जिस खूबी से कोर्ट में जिरह की उससे सुप्रीम कोर्ट के जज भी काफी प्रभावित हुए हैं।

खुद ही कोर्ट में जिरह के लिए पहुंची महिला

खुद ही कोर्ट में जिरह के लिए पहुंची महिला

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल 11 नवंबर को एक ऐसा ही मामला सामने आया, जिसमे जस्टिस अजय रस्तोगीऔर जस्टिस सीटी रवि कुमार की बेंच ने संपत्ति के विवाद से जुड़े एक केस पर सुनवाई की। यह मामला राजस्थान का है, जहां महिला और उसके भाई दौलत राम के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। लंबे समय तक जब महिला कोर्ट के चक्कर लगाकर थक गई तो उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। महिला जिनका नाम गीता देवी है वह खुद ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर पहुंच गई, लेकिन जब सुनवाई की बारी आई और महिला को जज ने कोर्ट में देखा तो पूछा कि आपके वकील कहा हैं तो उन्होंने कहा कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं उनका इंतजाम कर सकूं।

क्या कहना है महिला का

क्या कहना है महिला का

महिला ने कहा कि वकील की फीस इतनी ज्यादा है कि मैं उसका वहन नहीं उठा सकती। लिहाजा मैं खुद ही अपने मुकदमे की सुनवाई में हिस्सा लेना चाहती हूं और मैं खुद ही अपने केस के लिए जिरह करूंगी। महिला ने कहा कि मैंने निचली अदालतों के इतने चक्कर लगाए हैं कि मैं दांव-पेंच सीख चुकी हूं। जिसके बाद महिला ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना शुरू किया, जिसे सुनकर जस्टिस रस्तोगी भी दंग रह गए। कोर्ट में मौजूद वकीलों के लिए भी यह हैरान कर देने वाला मामला था, हर कोई महिला की काबिलियत को देखकर दंग रह गया।

कोर्ट ने मुहैया कराया वकील

कोर्ट ने मुहैया कराया वकील

जिस तरह से बिना लॉ की डिग्री के महिला ने केस में बहस की वह हर किसी के लिए चौंकाने वाला था। महिला का कहना था कि मेरे लिए कोर्ट में सरकारी वकील ही खड़े होते थे, लेकिन वह बिना मन के जिरह करते थे। महिला ने कोर्ट में मौजूद वकीलों से कहा कि आप बुरा मत मानिए, ये मैं हर किसी के लिए नहीं कह रही हूं। महिला की बात को सुनकर जस्टिस रस्तोगी ने कहा कि कोर्ट आपको वकील मुहैया कराएगी। सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा का कहना है कि संविधान के अनुसार न्याय पाने का अधिकार हर किसी को हासिल है, लिहाजा अनुच्छेद 39 ए के तहत हर किसी के लिए इसकी व्यवस्था की गई है। अगर आरोपी वकील नहीं भी चाहता है तो भी उसे वकील मुहैया कराया जाएगा।

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