महिला का दावा, COVID-19 संक्रमित पति अस्पताल से हुआ लापता, स्टाफ ने कहा- कर दिया अंतिम संस्कार

हैदराबाद। भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित मामलों की संख्या 1 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार देशभर में कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस बढ़कर 112359 हो गए हैं वहीं, महामारी से अब तक 3303 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी बीच समय-समय पर कई राज्यों से ऐसी खबरें भी आती रही हैं कि परिजनों को सूचित किए बिना अस्पताल वाले कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार कर दे रहे हैं। ताजा मामला तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सामने आया है।

16 मई को गांधी अस्पताल से मिली थी छुट्टी

16 मई को गांधी अस्पताल से मिली थी छुट्टी

यहां एक महिला के पति को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन कुछ दिनों बाद उनको पता चला कि उनके पति की मौत हो चुकी है और उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। अस्पताल की इस लपरवाही के बाद से तेलंगाना प्रशासन में हंगामा मचा हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक वनस्थलीपुरम कॉलोनी में रहने वाली अलमपल्ली माधवी को हाल ही में कोरोना इलाज के बाद 16 मई को गांधी अस्पताल से दो बेटियों के साथ छुट्टी दी गई थी।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से की शिकायत

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से की शिकायत

महिला का दावा है कि उनके 42 वर्षीय पति भी उसी अस्पताल में भर्ती थे और अब वह कई दिनों से गायब थे। हालांकि, अस्पताल अधिकारियों ने सूचना दी है कि 1 मई को ही उनके पति की मृत्यु हो गई और उसके अगले दिन ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उसके परिवार के सदस्यों को सूचित करने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। अलमपल्ली माधवी ने इस मालमे में तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के टी रामा राव को टैग करते हुए एक ट्वीट भी किया था।

बिना बताए किया था अंतिम संस्कार

बिना बताए किया था अंतिम संस्कार

अलमपल्ली माधवी ने अपने ट्वीट में लिखा था कि उनके पति ए मधुसूदन, जो एक राइस मिल में कर्मचारी है वह 16 मई को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अभी तक घर नहीं पहुंचे हैं। माधवी ने मंत्री से शिकायत की कि उनके पति को 27 अप्रैल को राजा कोठी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बाद में 30 अप्रैल को गांधी अस्पताल ले जाया गया। माधवी दावा किया कि अस्पताल के अधिकारियों ने पति का अंतिम संस्कार करने को लेकर उनसे अनुमति नहीं ली थी।

अस्पताल ने अरोपों पर क्या कहा

अस्पताल ने अरोपों पर क्या कहा

माधवी ने अस्पताल पर आरोप लगाय है कि उन्हें उनके पति के शरीर की पहचान को भी नहीं दिखाया था। उन्होंने श्मशान वीडियो, फोटो या उनके सामान जैसे कोई सबूत नहीं दिखाए थे। माधवी ने बताया कि 16 मई को जब हमें छुट्टी मिली हमने अस्पताल के अधिकारियों से मेरे पति के बारे में पूछताछ की, लेकिन उन्होंने उचित जवाब नहीं दिया। उन्होंने पहले कहा कि वह अभी भी वेंटिलेटर पर हैं लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि वह जीवित नहीं हैं। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि मेरे पति के लापता मामले की जांच में हमारी मदद करें। हालांकि अस्पताल ने इस पर सफाई देते हुए महिला के आरोपों को गलत बताया है।

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