शीतकालीन सत्र: भाजपा नहीं पास होने देगी सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल

केंद्र सरकार शीत कालीन सत्र में सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल पारित करवाना चाहेगी। जिसका भाजपा और अन्य दल व्यापक विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह बिल पास होने से राज्य के संवैधानिक अधिकार सीमित रह जाएंगे। सत्र में भाजपा देश की आंतरिक सुरक्षा का भी मुद्दा उठाएगी, यह ध्यान देने योग्य है कि पटना में हुए ब्लास्ट में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया गया था।
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के नेता एक्जिट पोल के उनके पक्ष में आने से जोश से भरे हुए हैं और वह सरकार को घेरने के लिए तैयार हैं। यूपीए का सांप्रदायिक हिंसा विरोधी बिल रोंकने के लिए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है, भाजपा किसी भी तरह से इस बिल को पास होने से रूकवाना चाहती है।
12 दिनों के सत्र में सरकार के पास 38 बिल पास कराने की चुनौती है जिसमें महिला आरक्षण और लोकपाल बिल प्रमुख है। सरकार रेलवे के लिए सप्लीमेंट्री बजट लाने का भी प्रयास करेगी। इसके अलावा 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी भी है। इस मौके पर 1992 से ही संसद सत्र चलने में बाधा आती है।












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