रूस-यूक्रेन संकट को टालने में अमेरिका कामयाब हो पाएगा?

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन तीन चीज़ें करने के लिए यूरोप पहुंचे हुए हैं. वो यूक्रेन को आश्वस्त करना चाहते हैं कि रूसी सैन्य ख़तरों के ख़िलाफ अमेरिका उसका समर्थन करेगा.

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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन तीन चीज़ें करने के लिए यूरोप पहुंचे हुए हैं. वो यूक्रेन को आश्वस्त करना चाहते हैं कि रूसी सैन्य ख़तरों के ख़िलाफ अमेरिका उसका समर्थन करेगा, अगर ज़रूरत पड़ती है तो सहयोगियों के बीच एकजुट और आक्रामक प्रतिक्रिया के लिए अमेरिका सहयोग हासिल करेगा और कूटनीतिक हल के लिए अपने रूसी समकक्ष के साथ बैठेगा या कम से कम ऐसा दिखाएगा जिससे ये न लगे कि अमेरिका डिप्लोमेसी छोड़ रहा था. ये साफ़ तौर पर ज़ल्दबाजी में किया गया दौरा है.

अमेरिकी अधिकारियों के पास यूक्रेनी राष्ट्रपति राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और विदेश सचिव दिमित्रो कुलेबा के साथ-साथ अमेरिकी दूतावास के जुड़े कर्मचारियों के साथ बैठकों को तैयार करने के लिए केवल दो दिनों का नोटिस था. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मिस्टर ब्लिंकन ने एक ही संदेश दिया- अमेरिका यूक्रेन के साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि रूस के पास एक तरफ़ "कूटनीति और बातचीत" और दूसरी तरफ़ "संघर्ष और परिणाम" विकल्प के तौर पर था. पहले दिन के बाद ऐसा लग रहा था कि अमेरिका प्रगति कर रहा है.

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डिप्लोमेसी चल ही रही थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति का जो बाइडन का बयान सामने आया. लगभग दो घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने कहा कि अमेरिका निश्चित तौर पर अपने सहयोगियों के साथ बातचीत करेगा कि रूस द्वारा यूक्रेन में ''मामूली घुसपैठ'' का जवाब कैसे दिया जाए. उन्होंने कहा कि ऐसा संभव है कि रूस यूक्रेन के 'अंदर' घुसेगा. लेकिन जब बात डिप्लोमेसी की होती है तो कुछ सच ऐसे होते हैं जिनका न कहा जाना ही बेहतर है.

क्वाड का मकसद

अगले दिन विदेश मंत्री ब्लिंकन, अमेरिकी "क्वाड" सहयोगियों से मिल रहे थे. बर्लिन में जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस के अधिकारियों से मुलाक़ात हो रही थी. लेकिन उन्हें दिन का ज़्यादातर हिस्सा रूसी घुसपैठ के सामने गठबंधन की एकता को चमकाने की बजाए अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान की सफाई में बिताना पड़ा.

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'नॉर्ड स्ट्रीम-2' गैस पाइपलाइन

इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की नाराज़गी भरे ट्वीट कर रहे थे. बाकी के दूसरे सरकारी अधिकारी इस बात की झल्लाहट में थे कि प्रेसिडेंट बाइडन ने अपने बयान से रूसी आक्रमण को 'हरी झंडी' दे दी. जर्मनी की विदेश मंत्री अनालेना बेयरबॉक के साथ एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस भी रखा गया. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तृत रूप से चर्चा कि गई कि अगर रूस हमला करता है तो किस तरह के प्रतिबंध लगेंगे. हालांकि, दोनों में से किसी ने इस बारे में चर्चा पर दिलचस्पी नहीं दिखाई कि क्या रूस से जर्मनी तक 'नॉर्ड स्ट्रीम-2' गैस पाइपलाइन को निलंबित करना भी एक संभावना है.

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ऊर्जा प्रतिबंध की संभावना

ऊर्जा प्रतिबंध एक ऐसा तरीका है जिससे रूस पर सबसे अधिक मार पड़ेगी लेकिन ऐसी संभावना नहीं लगती. क्योंकि यूरोप, रूसी प्राकृतिक गैस पर निर्भर है और अमेरिका में पेट्रोल की कीमत बढ़ने का असर वहाँ की राजनीति पर भी पड़ेगा, ऐसा बाइडेन नहीं चाहेंगे. बाकी "क्वाड" में भी दिक्कतें हैं. ऐसा लगता है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अलग कूटनीतिक रणनीति बनाने के लिए उत्सुक हैं. अमेरिका और उसके सहयोगी अच्छी तरह से मामले को देख रहे हैं लेकिन जिस तरीक़े से ये हफ़्ता चल रहा है है, रूस को कम से कम कुछ बढ़त तो मिली है.

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द्विपक्षीय बैठक

ब्लिंकन और रूस के सर्गेई लावरोव के बीच शुक्रवार को हुई द्विपक्षीय बैठक भी एक तमाशा ही था. स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा के ऐतिहासिक प्रेसिडेंट विल्सन होटल में अमेरिकी और रूसी पत्रकारों की खचाखच भीड़ थी. रूसी प्रेस सेक्रेटरी मारिया ज़खारोव की शिकायत थी कि वो ऐसे पत्रकारों से जो अपने मोबाइल फोन से उन्हें रिकॉर्ड करने की भगदड़ मचाए हुए थे, ऐसे लोगों से वो अचानक जाकर बातचीत नहीं कर सकती थीं. आख़िरकार, लावरोव और ब्लिंकन ने अपना-अपना उद्गाघटन भाषण दिया.

लावरोव का कहना था कि उन्हें "ठोस प्रस्तावों के ठोस जवाब" की उम्मीद है- जिसमें ये मांग भी शामिल है कि नाटो कभी भी यूक्रेन जैसे पूर्व सोवियत देशों में विस्तार नहीं करेगा. वहीं ब्लिंकन ने अपनी ओर से दोहराया कि रूसी आक्रमण का अमेरिका और उसके सहयोगी "एकजुट, तेज और गंभीर प्रतिक्रिया" देंगे. बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने कहा कि ''बहुत कम प्रगति हुई है - लेकिन बहुत कम उम्मीद की गई थी.''

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यूक्रेन की सीमाओं पर 100,000 से अधिक रूसी सैनिक तैनात हैं लेकिन लावरोव ने कहा कि रूस की यूक्रेन पर हमला करने की कोई योजना नहीं है. ब्लिंकन का कहना है कि अमेरिका, यूरोपीय देशों के लिए नेटो की 'ओपन डोर' विस्तार नीति के साथ खड़ा है. साथ ही ये ब्लिंकन ने ये वादा भी किया कि वो अगले हफ़्ते रूस की 'चिंताओं' पर लिखित जवाब देंगे. ये पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका यूक्रेन की रक्षा के लिए अपनी सेना के इस्तेमाल करने पर विचार करेगा, ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका अपने नाटो सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन यूकेन के अधिकारी इस बात से वाकिफ़ हैं कि यूक्रेन, नेटो का सदस्य देश नहीं है.

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दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने का वादा किया. साथ ही बाइडन और पुतिन के बीच भविष्य की बैठक की संभावना भी बनी रहने दी. लेकिन कुल मिलाकर चाहे संकट का समाधान कैसे भी हो, ये तमाशा भी रूस के लिए एक जीत है. ये रूस के बनने का कूटनीतिक संघर्ष है. रूस के उठाए गए कई कदमों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आक्रामक गतिविधियों के लिए उकसाया. ऐसे समय में जब अमेरिका, चीन के साथ प्रतियोगिता पर विचार कर रहा है. एक बार फिर दुनियाभर का ध्यान रूस की तरफ गया है. ब्लिंकन ने गुरुवार को बर्लिन में दिए गए अपने भाषण में रूस के पुराने दांव पेच गिनाए. फिर कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि रूस शीत युद्ध के दिनों में लौटना चाहता है. वो कहते हैं, "हमें उम्मीद है कि ऐसा नहीं है लेकिन अगर (व्लादिमीर पुतिन) ऐसा करने का विकल्प चुनते हैं, तो उनसे उसी दृढ़ संकल्प और एकता के साथ मुलाकात की जाएगी, जिसे पिछली पीढ़ियों के नेताओं और नागरिकों ने शांति को आगे बढ़ाने, स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने, पूरे यूरोप और दुनियाभर में मानवीय गरिमा को आगे बढ़ाने के लिए सहन की थी."

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दोनों ही पक्ष अब भी बातचीत कर रहे हैं, लेकिन बिना किसी नतीजे के साथ बातचीत इतनी दूर तक ही जाती है. अगले सप्ताह अमेरिका की तरफ़ से मिलने वाली लिखित प्रतिक्रिया का इस्तेमाल रूस आगे बढ़ने के बहाने के तौर पर कर सकता है. यूक्रेन में, अमेरिकी राजनयिकों को नहीं पता कि आख़िर आगे क्या उम्मीद की जाए-ज़्यादा साइबर युद्ध की आशंका, एक "मामूली घुसपैठ" या दसियों हज़ार रूसी सैनिकों का देश में तीन तरफ से घुसपैठ और कीव में उतरने वाले पैराट्रूपर्स की आशंका. वो कहते हैं, कुछ भी संभव है.

अमेरिका तब तक रूस से बात करने की कोशिश करने के लिए दृढ़ दिख रहा हैजब तक जब तक कि मौसम की बारिश टैंक आक्रमण को अव्यावहारिक न बना दे. जहां तक ​​रूस की बात है तो, ब्लिंकन और बाइडन दोनों अपने निष्कर्ष को लेकर साफ हैं कि ये आख़िरकार इस बात पर निर्भर करेगा कि पुतिन के दिमाग में चल क्या रहा है?

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