एक दिन में मोदी सरकार के तीन फैसले क्या चुनावों में भाजपा की उम्मीदों को बेहतर करेंगे?
नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी सरकार ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधासभा चुनावों के बीच में तीन बड़े फैसले लिए हैं। साउथ के सदाबहार सुपर स्टार रजनीकांत को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान देने का फैसला लिया गया है तो छोटी सरकारी ब्याज योजनाओं पर ब्याज दर घटाने के आदेश को चंद घंटों में ही पलट दिया गया है। एक दिन पहले ही एलपीजी गैस के दाम महीनो बाद पहली बार कम किए गए हैं। सवाल है कि इन फैसलों से पांचों प्रदेशों में भाजपा की चुनावी उम्मीदों को कितना फायदा मिलेगा? या इनमें से कुछ फैसले से उसे नफा की जगह नुकसान होने की भी आशंका है? पढ़िए इन्हीं संभावनाओं-आशंकाओं को टटोलती वन इंडिया की यह खास रिपोर्ट।

1. रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड
तमिलनाडु में मतदान से ठीक पांच दिन पहले मोदी सरकार ने सुपर स्टार रजनीकांत को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड देने का ऐलान किया है। तमिलनाडु में 6 अप्रैल को वोटिंग होनी है। साल 2019 के लिए इस पुरस्कार की घोषणा करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने उन्हें भारतीय सिनेमा का एक महान अभिनेता बताया है। 2018 में यह पुरस्कार अमिताभ बच्चन को मिला था, लेकिन उसके बाद तीन साल तक यह पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया। और अब नाम आया है तो रजनीकांत जैसी तमिलनाडु की लोकप्रिय शख्सियत का है, जिन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने और इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने का भी फैसला कर चुके हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। यूं तो रजनीकांत हिंदी दर्शकों के बीच भी लोकप्रिय हैं, लेकिन दक्षिण भारत की फिल्मी दुनिया खासकर तमिलनाडु में उनका प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। बड़ी बात ये है कि उन्हें यह पुरस्कार 3 मई को दिया जाना है यानी राज्य में चुनाव नतीजे आने के ठीक अगले दिन। पीएम मोदी ने भी थलाइवा को यह पुरस्कार दिए जाने पर उन्हें बधाई दी है।
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2. छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें घटाने का फैसला वापस
मोदी सरकार के आलोचक चाहे जो भी आरोप लगाएं, लेकिन पिछले सात वर्षों में देखा गया है कि वह ज्यादातर फैसले काफी सोच-समझकर लेती है और भारी-विरोध के बावजूद भी आमतौर पर उसपर अडिग ही रहती है। लेकिन, वित्त वर्ष 2021-22 के पहले ही दिन जिस तरह से उसने भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने का फैसला लिया, उसने सबको चौंका दिया है। क्योंकि,यह पहली ही नजर में बहुत ही अलोकप्रिय कदम दिखाई दे रहा था। लेकिन, शायद सरकार को जल्दी ही अपनी गलती का एहसास हो गया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उतनी ही तेजी से पुराने रेट ही जारी रहने की घोषणा कर दी। सबसे बड़ी बात ये है उन्होंने सार्वजनिक तौर पर माना कि यह आदेश भूल से जारी हो गया था। गौर करने लायक बात ये है कि जिस दिन असम और पश्चिम बंगाल में दूसरे दौर की अहम वोटिंग हो रही थी, उस दिन इस तरह का फैसला लेना मोदी सरकार की बहुत बड़ी रणनीतिक चूक मानी जा रही है। बहरहाल, फैसला पलटकर उसने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश जरूर की है।

3. एलपीजी पर 10 रुपये की कटौती
पिछले दो महीने में रसोई गैस 125 रुपये तक महंगा हो गया था। बीते वित्त वर्ष के अंतिम दिन यानी 31 मार्च को ही साफ हो गया था कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से एलपीजी के दाम 10 रुपये प्रति सिलेंडर कम हो जाएंगे। हालांकि, 125 रुपये के मुकाबले यह कमी 10 फीसदी से भी कम है। लेकिन, बंगाल और असम जैसे राज्यों के लिए जहां गुरुवार को 69 सीटों पर वोटिंग हो रही है, वहां के आम मतदाताओं के लिए यह एक बड़ा सकारात्मक संदेश जरूर माना जा सकता है। क्योंकि, दोनों जगहों पर भाजपा के खिलाफ विरोधियों ने महंगाई को एक अहम मुद्दा बनाने की कोशिश की है। वैसे संभावना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर आने वाले दिनों में ऐसी और कटौती देखने को मिल सकती है।

इन तीन फैसलों से चुनावों में भाजपा को कितना फायदा ?
जहां तक तमिलनाडु की बात है तो वहां की राजनीति में फिल्मी सितारे ईश्वर की तरह पूजे जाते रहे हैं। यहां के वोटर टीवी-फ्रिज या वॉशिंग मशीन मिलने के नाम पर वोटिंग करने के लिए जाने जाते हैं तो भावनात्मक आधार पर वोटिंग करने के लिए भी यह राज्य मशहूर रहा है। ऐसे में रजनीकांत जैसे लोकप्रिय शख्सियत के लिए देश के सबसे बड़े फिल्म अवॉर्ड की घोषणा सत्ताधारी एनडीए गठबंधन को फायदा दिला सकता है, इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन, छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर को लेकर मोदी सरकार से हुई गड़बड़ी से उसके प्रति आम मतदाताओं में अच्छा संदेश नहीं गया है। ऊपर से विपक्ष को उनके मन में आगे के लिए आशंकाएं पैदा करने का मौका भी मिल गया है। हालांकि, सरकार ने डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में देर नहीं की है, लेकिन भाजपा को इसका कुछ ना कुछ खामियाजा जरूर भुगतना पड़ सकता है। इसी तरह एलपीजी के दाम में 10 रुपये की कमी तब ज्यादा कारगर हो सकती है, जब अगले दौर से पहले ऐसी कटौती और देखने को मिल जाए।












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