22 साल बाद क्या भाजपा कर पाएगी दिल्ली फतह, लोकसभा चुनाव जैसे मिले वोट तो मिलेंगीं कितनी सीटें?

नई दिल्ली- दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान होने के साथ बीजेपी 22 साल बाद राजधानी की सत्ता में वापसी की उम्मीदें देख रही है। बीजेपी 2015 का झटका भुलाकर भरोसा कर रही है कि इस बार वह दिल्ली प्रदेश की सत्ता में आम आदमी पार्टी को दोबारा वापस लौटने नहीं देगी। दरअसल, 2015 का दिल्ली विधानसभा चुनाव आज भी पार्टी के लिए एक बहुत बुरे सपने से कम नहीं है। लेकिन, पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को नरेंद्र मोदी की चुनावी सुनामी में जो कामयाबी मिली थी, उससे पार्टी को लगता है कि अरविंद केजरीवाल को सत्ता से उखाड़ फेंकना इतना मुश्किल भी नहीं है। इसकी वजह ये है कि आम चुनावों में दिल्ली में पार्टी को जितने वोट मिले थे, शायद उसके बारे में कभी पार्टी के मैनेजरों ने भी नहीं सोचा होगा। आइए जानते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनावों के परिणाम के आसपास ही दिल्ली के नतीजे 2020 के विधानसभा चुनावों में भी आए तो भाजपा कितनी और कौन-कौन सीटें जीत सकती है और उसके विरोधियों यानि सबसे बड़ी चुनौती आम आदमी पार्टी और कांग्रेस कहां खड़ी रह सकती है?

लोकसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन

लोकसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन

पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने दिल्ली की सातों सीटें जीती थीं, इस विधानसभा चुनाव ये बात तो महत्वपूर्ण है ही। लेकिन, उससे ज्यादा अहम ये है कि भाजपा को अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में वोट कितने मिले थे और उसके मुकाबले उसकी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां कहां पर थीं। सबसे पहले बात चांदनी चौक लोकसभा सीट की जहां बीजेपी के उम्मीदवार डॉक्टर हर्षवर्धन 53% वोट पाकर विजय रहे थे। वहीं कांग्रेस के जेपी अग्रवाल को 30% और आम आदमी पार्टी के पंकज कुमार गुप्ता को 15% वोट मिले थे। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी 54% लेकर जीतने में सफल हुए थे। जबकि, उनके मुकाबले दिल्ली में सत्ताधारी एएपी के दिलीप पांडे को 13% और कांग्रेस की उम्मीदवार शीला दीक्षित को 29% वोट मिले थे। इसी तरह पूर्वी दिल्ली में बीजेपी के प्रत्याशी गौतम गंभीर 55% से भी ज्यादा वोट लेकर सांसद बने थे तो कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली को 24% और एएपी की आतिशी मार्लिना महज 17% लेकर तीसरे नंबर पर रही थीं। वहीं नई दिल्ली लोकसभा सीट से बीजेपी की मीनाक्षी लेखी 55% वोट लेकर विजयी हुई थीं तो कांग्रेस के अजय माकन ने 27% वोट हासिल किए थे और केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के ब्रिजेश गोयल 16% वोट लेकर तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे। वहीं उत्तर पश्चिमी दिल्ली में बीजेपी के हंस राज हंस ने 60% से भी ज्यादा वोट लेकर सबके छक्के छुड़ा दिए थे। हालांकि, इस सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गुगन सिंह ने 31% वोट लेकर किसी तरह से दूसरे स्थान पर जगह बनाई थी। जबकि, कांग्रेस के राजेश लिलोथिया को 17% वोट मिल पाए थे। पश्चिमी दिल्ली में बीजेपी के प्रवेश सिंह वर्मा ने 60% वोटों से जीत दर्ज की थी और कांग्रेस के महाबल मिश्रा को 20% और एएपी के बलवीर सिंह जाखड़ 17% वोट ही मिल पाए थे। दक्षिणी दिल्ली में भी बीजेपी के रमेश बिधूड़ी को 57% वोट मिले थे, जबकि आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा को 26% और कांग्रेस के विजेंद्र सिंह को 14% ही वोट प्राप्त हुए थे।

लोकसभा की तर्ज पर वोटिंग हुई तो बीजेपी को 65 सीटें

लोकसभा की तर्ज पर वोटिंग हुई तो बीजेपी को 65 सीटें

अगर दिल्ली विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनाव की तर्ज पर हुए तो राजधानी में 2015 के विधानसभा चुनावों की कहानी ही दिखाई पड़ सकती है, अलबत्ता पार्टियों की स्थिति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। मसलन, 2015 में आम आदमी पार्टी ने विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतीं थीं और बीजेपी को सिर्फ 3 सीटों पर ही खाता खुल पाया था। कांग्रेस का तो केजरीवाल की हवा में पूरी तरह से दिया ही बुझ गया था। लेकिन, अगर पिछले लोकसभा चुनावों में मिले दिल्ली के सभी 70 विधानसभा सीटों के वोटों का विश्लेषण करें तो इस बार बाजी पूरी तरह से पलट सकती है। मसलन, 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को दिल्ली में 65 सीटें मिल सकती हैं। जबकि, 5 सीटें लेकर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रह सकती है और इस बार आम आदमी पार्टी का खाता भी नहीं खुल सकता है। क्योंकि, पिछले लोकसभा चुनाव में 70 में से किसी भी विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार बढ़त नहीं बना सका था। जबकि, 5 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार आगे रहे थे।

कौन-कौन सीटें जीत सकती है कांग्रेस?

कौन-कौन सीटें जीत सकती है कांग्रेस?

2019 के लोकसभा चुनावों के आधार पर वोटिंग होने की स्थिति में कांग्रेस को सबसे ज्यादा चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में फायदा हो सकता है, जहां वह 10 में से 3 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। ये सीटें हैं- चांदनी चौक, मटिया महल और बल्लीमारन। इसके अलावा उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीलमपुर सीट और पूर्वी दिल्ली की ओखला विधानसभा सीट भी कांग्रेस के उम्मीदवार के खाते में जा सकती है।

भाजपा इन 65 सीटों पर जीत सकती है

भाजपा इन 65 सीटों पर जीत सकती है

लोकसभा चुनाव में पड़े वोट के आधार पर भाजपा के उम्मीदवार चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र की आदर्श नगर, शालीमार बाग, शकुर बस्ती, त्रि नगर, वजीरपुर,मॉडल टाउन और सदर बाजार, उत्तर पूर्वी दिल्ली की बुराड़ी, तिमारपुर, सीमा पुरी, रोहतास नगर, घोंडा, बाबरपुर, गोकुलपुरी, मुस्तफाबाद और करावल नगर, पूर्वी दिल्ली की जंगपुरा, त्रिलोकपुरी, कोंडली, पटपड़गंज, लक्ष्मीनगर, विश्वास नगर, कृष्णा नगर, गांधी नगर और शाहदरा, नई दिल्ली की करोलबाग, पटेल नगर, मोती नगर, दिल्ली कैंट, राजेंद्र नगर, नई दिल्ली, कस्तुरबा नगर, मालवीय नगर, आर के पुरम, ग्रेटर कैलाश, उत्तर पश्चिमी दिल्ली की नरेला, बादली, रिठाला, बवाना, मुंडका, किरारी, सुल्तानपुर माजरा, नांगलोई जाट, मंगोल पुरी और रोहिणी, पश्चिमी दिल्ली की मादीपुर, राजौरी गार्डन, हरी नगर, तिलक नगर, जनकपुरी, विकासपुरी,उत्तम नगर, द्वारका, मटियाला और नजफगढ़ और दक्षिण दिल्ली की बिजवासन, पालम, मेहरौली, छतरपुर, देओली,अंबेडकर नगर, संगम विहार, कालकाजी, तुगलकाबाद और बदरपुर विधानसा क्षेत्रों में भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज कर सकती है।

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