कर्नाटक में राहुल को मिल रहा जनसमर्थन वोटों में तब्दील होगा?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक विधानसभा चुनाव के अपने पहले चरण के प्रचार अभियान के बाद जब दिल्ली वापिस लौटे तो उनके चेहरे पर लंबी मुस्कान तैर रही थी. यह मुस्कान गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान हुए प्रचार से भी ज़्यादा बड़ी थी.
इन अलग-अलग मुस्कानों की तुलना करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि नरेंद्र मोदी का सामना करने के लिए राहुल गांधी के पास सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही हथियार है- आक्रामक तेवर अपनाते हुए मोदी पर जुबानी हमले करना.
मोदी ने कांग्रेस को पिछले 22 सालों से गुजरात की सत्ता से दूर रखा हुआ है, वो गुजरात के मुख्यमंत्री पद के रास्ते आज देश के प्रधानमंत्री के पद पर काबिज़ हैं.
वहीं दक्षिणी राज्य कर्नाटक में राहुल गांधी की पार्टी की सरकार है, वो पिछले चार साल नौ महीनों से वहां सत्ता में हैं. उन्हें जनता के बीच अपनी सरकार के कामों का प्रचार करना है ताकि वे अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान जनता का भरोसा एक बार फिर जीत सकें.
राहुल का आक्रामक रुख़
राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव अभियान की ही तरह यहां भी आक्रामक रुख़ अपनाया. वो मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार के कामों की तुलना मोदी की केंद्र सरकार से करते रहे.
चुनाव प्रचार के दौरान वो काफी सावधानी से अपने मुद्दे चुन रहे हैं और फिर उन मुद्दों के सहारे वो मोदी सरकार पर तंज भी कसते हैं, कि मोदी कैसे सिद्धारमैया से सरकार चलाना सीख सकते हैं.
जनता की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच राहुल कहते हैं, "मोदी जी भारत की गाड़ी उसके किनारों पर लगे शीशों को देखकर चला रहे हैं जिसकी वजह से नोटबंदी जैसे फ़ैसले लेकर वो देश की गाड़ी को गड्ढे में गिरा रहे हैं. वहीं सिद्धारमैया कर्नाटक की गाड़ी सीधा आगे देखकर चला रहे हैं और इसीलिए यहां कोई दुर्घटना नहीं घटी."
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किसानों के साथ संवाद करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात तक उनसे किसानों का कर्ज़ माफ़ करने की गुज़ारिश की थी लेकिन प्रधानमंत्री ने उन्हें इस बात का कोई जवाब ही नहीं दिया.
वहीं दूसरी तरफ वो सिद्धारमैया और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का उदाहरण देते हैं कि दोनों राज्यों ने हफ्ते या 10 दिन के भीतर किसानों के कर्ज़ माफ़ कर दिए.
राहुल गांधी जब किसानों से यह सवाल पूछते हैं कि यूपीए सरकार के जाने के बाद उनकी आय बढ़ी है या घटी है तो सभी किसान एक सुर में कहते हैं कि उनकी आय में गिरावट आई है.
किसानों की प्रतिक्रिया के साथ राहुल गांधी को यह कहने का मौका भी मिल जाता है कि कांग्रेस सरकार हमेशा किसानों की हिमायती रही है जबकि मोदी सरकार ने पहले नोटबंदी और फिर गब्बर सिंह टैक्स लगाया (जीएसटी ) और किसानों की कमर ही तोड़ दी.
दलितों और आदिवासियों पर जोर
किसानों के बाद राहुल अनुसूचित जाति और जनजाति का मुद्दा उठाते हैं. वो कहते हैं कि मोदी ने दलित और आदिवासियों के कल्याण के लिए 55 हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किए जबकि उनकी कर्नाटक सरकार ने अकेले ही इस काम के लिए 27 हज़ार करोड़ रुपये जारी किए हैं.
राहुल गांधी का अपनी रैलियों में दलित और आदिवासियों का मुद्दा उठाना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि कर्नाटक में इन दोनों समुदायों की अच्छी खासी आबादी है. राहुल ने एक जनजातीय सम्मेलन को भी संबोधित किया जहां उन्हें सुनने के लिए अच्छी तादात में लोग पहुंचे.
लेकिन राहुल गांधी की जिस बात पर जनता सबसे अधिक समर्थन करती नजर आ रही थी वो राहुल का एक सवाल था. जब राहुल जनता से पूछते, "मोदी जी ने आप सभी के खातों में 15-15 लाख रुपये डालने का वायदा किया था, क्या आपको उनकी तरफ से 10 रुपये भी मिले" तो लोग एक शोर में उनका सवाल का जवाब देते.
होसपेट में बीजेपी के लिए काम कर चुके सोमाशेखर कहते हैं, "जो सवाल राहुल गांधी उठा रहे हैं उनके जवाब इस समय देना आसान नहीं है, फिर चाहे वो जीएसटी से जुड़े हों या नोटबंदी से संबंधित."
गंगावटी में युवा छात्र दस्तगीर पीर कहते हैं, "सभी के खातों में 15 लाख रुपये जमा करवाने वाला वायदा तो अब पूरी तरह से झूठा साबित हो चुका है, इस बात में कोई शक़ नहीं कि इस मामले में बीजेपी के प्रति लोगों के मन में नकारात्मक विचार हैं."
राहुल को जनसमर्थन
हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में कुल छह ज़िले आते हैं, जिसमें बिदर, गुलबर्ग, यदगीर, रायचूर, कोप्पल और बेल्लारी शामिल हैं. साल 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने इस क्षेत्र की 40 सीटों में से 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं बीजेपी और केजीपी ने मिलकर 10 सीटें, जनता दल(एस) ने चार और दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती थीं.
यह तो साफ है कि इस पूरे क्षेत्र में कांग्रेस की पकड़ मजबूत है. कांग्रेस जब सत्ता में थी तो उसने इस इलाके के लिए अनुच्छेद 371(जे) पास करवाया था. संविधान में संशोधन कर पास हुए इस अनुच्छेद के बाद इस इलाके के छात्रों को 5 हज़ार मेडिकल और इंजीनियरिंग की सीटें प्राप्त हुई थी साथ ही 20 हज़ार युवाओं को नौकरियां भी मिली थी. कांग्रेस इस बात का फ़ायदा भी चुनावों में उठाने का प्रयास करेगी.
यह देखना होगा कि क्या कर्नाटक की जनता राहुल और सिद्धारमैया के चेहरे पर भरोसा कर कांग्रेस को वोट देगी?
जब यह सवाल जनता से पूछा गया तो उनके अलग-अलग मत देखने को मिले. कुछ महिलाएं 'इंदिरा अम्मा' के पोते को देखकर बहुत उत्साहित हो रही थीं. वहीं कई लोग ऐसे भी थे जो यह मान रहे थे कि यह चुनाव मोदी और सिद्धारमैया के बीच लड़ा जाएगा.
गंगावटी विधानसभा के अरहला गांव के निवासी राजा साब केसरती कहते हैं, "सिद्धारमैया एक भले इंसान हैं और उनका वोट कांग्रेस को जाएगा. हम राहुल गांधी के बारे में अधिक नहीं जानते. हां मोदी एक फैक्टर जरूर हैं लेकिन येद्युरप्पा को उनका समर्थन नहीं है."
कुल मिलाकर देखा जाए तो राहुल गांधी को कर्नाटक में अच्छा जनसमर्थन मिलता हुआ दिख रहा है, यहां तक कि प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से जुड़े धार्मिक मठों से भी उन्हें अच्छा समर्थन मिला है. इसी समर्थन की दम पर राहुल कह पा रहे हैं कि वो दोबारा कर्नाटक की सत्ता पर काबिज़ होने में कामयाब रहेंगे.
वहीं जनता अब प्रधानमंत्री मोदी की अगली रैली की इंतज़ार कर रही है और जानना चाहती है कि राहुल गांधी के आक्रामक तेवरों का पीएम मोदी किस तरह जवाब देते हैं.
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