तमिलनाडु : विधानसभा चुनाव में क्या रंग जमा पाएंगे कमल हासन ?
नई दिल्ली। हिंदी और तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता कमल हसन क्या तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोई असर पैदा कर पाएंगे ? उनकी पार्टी मक्कल निधि माइम (एमएनएम) दो अन्य दलों से गठबंधन कर 154 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कामल हसन की सहयोगी पार्टी ऑल इंडिया सामाथुआ मक्कल काची 40 और इंडिया जननायगा काची 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। कमल हासन ने कोयम्बटूर दक्षिण सीट से पर्चा दाखिल कर दिया है। पहले चर्चा थी कि कमल एमजी रामचंद्रन की सीट अलांदुर से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन फिर उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। कमल हासन अपनी ईमानदारी को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने द्रविड़ पहचान के नाम पर राजनीति करने वाली द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों को भ्रष्ट बताया है। उनका दावा है कि वे भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए राजनीति में आये हैं। कमल हासन पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।
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क्या है कमल हासन की राजनीतिक स्थिति ?
कमल हासन ने 2018 में मक्कल निधि माइम (पीपल्स जस्टिस सेंटर) के नाम से एक राजनीतिक दल बनाया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने 36 उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन सभी की हार हुई थी। 36 में 11 प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे थे। उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था। एमएनएम को लोकसभा चुनाव में 3.72 फीसदी वोट मिले थे। 14 महीने पुरानी इस पार्टी ने शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत ठीक प्रदर्शन किया था। चेन्नई दक्षिण सीट पर कमल हासन की पार्टी को 12.03 फीसदी वोट मिले थे। चेन्नई उत्तर और चेन्नई सेंट्रल सीट पर भी इसके आसपास ही वोट मिले थे। कोयम्बटूर लोकसभा सीट पर एमएनएम के उम्मीदवार आर महेन्द्रन को 1 लाख 45 हजार वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव के दौरान ही तमिलनाडु विधानसभा की 22 रिक्त सीटों पर उपचुनाव हुए थे। इस चुनाव में कमल हासन की पार्टी ने 19 सीटों पर किस्मत आजमायी थी। एक पर भी जीत नहीं मिली। इन 19 सीटों में से वह दो पर तीसरे स्थान पर रही थी।
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कमल हासन के राजनीति खाते में कुछ खास नहीं
कमल हासन बहुमुखी प्रतिभा के कलाकार हैं। अभिनेता, पटकथा लेखक, निर्देशक और निर्माता के रूप में उन्होंने कई विशिष्ट उपलब्धियां प्राप्त की हैं। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। पांच भाषाओं में 19 फिल्म फेयर पुरस्कार जीते हैं। उनकी सात फिल्में ऑस्कर के लिए भेजी गयीं। यह भारत के किसी भी अभिनेता के लिए एक रिकॉर्ड है। वे एक करोड़ रुपये की फी लेने वाले भारत के पहले अभिनेता हैं। उनकी कई फिल्में जुबली हिट्स रही हैं। इतना कुछ होने पर भी वे अभी तक राजनीति में सफल नहीं हो सके हैं। लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों में उन्हें आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली। उन्होंने एमजी रामचंद्रन की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही थी। लेकिन उसके लिए अभी राजनीतिक परिस्थियां तैयार नहीं हुई हैं। एममजी रामचंद्रन सफल अभिनेता थे। जयललिता भी सफल अभिनेत्रीं थीं। करुणानिधि तमिल फिल्मों के सबसे बड़े पटकथा लेखक थे। उन्हें फिल्मों से शोहरत मिली। फिर वे मुख्यमंत्री बने। उस समय तमिलनाडु में फिल्मी सितारों की लोकप्रियता दिवानगी से कम नहीं थी। आज के दौर में तमिलनाडु बहुत बदल चुका है। फिल्मों की लोकप्रियता अब राजनीति में नहीं भुनायी जा सकती।

फिल्मों की लोकप्रियता हिट होने की गारंटी नहीं
विजयकांत भी तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता रहे हैं। उन्होंने 20 से अधिक फिल्मों पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभायी थी। 150 से अधिक फिल्मों में काम किया। फिर 2005 में देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम के नाम से एक राजनीतिक पार्टी बनायी। 2006 के विधानसभा चुनाव में सभी 234 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। वे केवल अपनी ही सीट जीत पाये। बाकी 233 प्रत्याशियों की हार हो गयी। लेकिन उन्होंने इस चुनाव में 10 फीसदी वोट हासिल कर सबको चौंका दिया था। 2011 के विधानसभा चुनाव में विजयकांत ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जयललिता के साथ चुनावी गठबंधन किया था। विजयकांत की पार्टी को 41 सीटें मिलीं थीं। जिसमें से उन्होंने 29 पर जीत हासिल की थी। जयललिता की सरकार बनी थी। यहां गौर करने वाली बात ये है कि विजयकांत ने 29 सीटें जीत कर द्रमुक जैसी मजबूत पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया था। 2011 के चुनाव में द्रमुक को केवल 23 सीटें ही मिलीं थीं। लेकिन सत्ता में भागीदारी को लेकर विजयकांत की जयललिता के साथ लड़ाई शुरू हो गयी। विवाद बढ़ने के बाद विजयकांत ने 2014 में जयललिता से गठबंधन तोड़ लिया और विधानसभा में अलग बैठने की मंजूरी हासिल कर ली। सदन में दूसरी पार्टी होने के कारण विजयकांत को नेता प्रतिपक्ष चुना गया। लेकिन जल्द ही विजयकांत की पार्टी में भी खटपट शुरू हो गयी। आठ विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। विजयकांत से नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी छीन गयी। 2016 के चुनाव में तो विजयकांत की स्थिति और खराब हो गयी। इस चुनाव में वे अपनी सीट भी हार हार गये थे। उनकी पार्टी ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन एक भी जीत नहीं मिली। यानी अब तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी कलाकार का होना, हिट होने की गारंटी नहीं है।












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