क्या गाय राष्ट्रीय पशु बनेगी? देश भर में चल रहे इस बहस पर केंद्र सरकार ने संसद में किया बड़ा खुलासा
Cow National Animal: देशभर में गाय को राष्ट्रीय पशु (National Animal) का दर्जा देने को लेकर समय-समय पर उठने वाली मांगों और राजनीतिक बहसों पर मंगलवार, 12 अगस्त को संसद में केंद्र सरकार ने अपना रुख बेहद साफ शब्दों में रख दिया। लोकसभा में हुई कार्यवाही के दौरान केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री एस. पी. सिंह बघेल (SP Singh Baghel) ने इस विषय पर स्थिति स्पष्ट कर दी।
उन्होंने अनुच्छेद 246(3) का उल्लेख करते हुए कहा कि पशुओं के संरक्षण से जुड़े कानून बनाने का अधिकार पूरी तरह राज्य विधानमंडलों के पास है, और फिलहाल केंद्र के पास गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है।

Rashtriya Gokul Mission: गोकुल मिशन से हो रहा गायों का संरक्षण
बघेल ने बताया कि केंद्र सरकार दिसंबर 2014 से राष्ट्रीय गोकुल मिशन लागू कर रही है। इस योजना का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को मजबूत करना है ताकि गायों का संरक्षण, संवर्धन और पालन-पोषण बेहतर तरीके से किया जा सके।
इसके तहत देशभर में देसी नस्ल की गायों के संरक्षण, डेयरी उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
दूध उत्पादन में गाय का बड़ा योगदान
संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 239.30 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ। इसमें गाय के दूध का योगदान 53.12% रहा, जबकि भैंस के दूध का हिस्सा 43.62% था। यह आंकड़े बताते हैं कि भारत के डेयरी सेक्टर में गाय का महत्व बेहद अहम है।
गाय पर फैसला राज्यों के हाथ में
गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग समय-समय पर विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा उठाई जाती रही है। लेकिन केंद्र ने साफ कर दिया है कि इस विषय पर फैसला लेना राज्यों का अधिकार है। ऐसे में, मौजूदा संवैधानिक ढांचे के तहत केंद्र के पास सीधे कानून बनाने का अधिकार नहीं है।
इस बयान ने सालों से चल रही अटकलों पर एक तरह से विराम लगा दिया, वहीं दूसरी ओर "गौ-रक्षा" को लेकर अलग-अलग राज्यों में जारी प्रयासों और बहसों को एक नया संदर्भ भी दे दिया। केंद्र का यह बयान न केवल इस मुद्दे पर चल रही चर्चाओं को दिशा देता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का रास्ता राजनीतिक से ज्यादा संवैधानिक और कानूनी होगा।












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