हिंदुओ की एकजुटता पर बोले भागवत, अकेले शेर को भी जंगली कुत्ते नोंच लेते हैं

अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया के हिंदुओं से मानव उत्थान के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

नई दिल्ली। अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व हिंदू कांग्रेस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया के हिंदुओं से मानव उत्थान के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। शिकागो के मंच से मोहन भागवत ने कहा, 'हिंदुओं को मिलाकर रखना कठिन काम है। शेर कभी समूह में नहीं चलता, लेकिन वह शेर हो या रॉयल बंगाल टाइगर, जब वह अकेले चल रहा होता है तो जंगली कुत्ते उसके ऊपर एक साथ आक्रमण कर उसे खत्म कर सकते हैं। इसलिए हिंदुओं को एकजुट होना ही होगा।'

'हजारों साल से प्रताड़ित हैं हिंदू'

'हजारों साल से प्रताड़ित हैं हिंदू'

मोहन भागवत ने कहा, 'हिंदू समाज हजारों साल से प्रताड़ित है। इसकी वजह यह है कि शुरुआत से ही हिंदुओं को एकजुट रखना मुश्किल रहा है। हिंदू समाज में मेधावियों की संख्या सबसे ज्यादा है, लेकिन वो कभी साथ नहीं आते, इसलिए बिखर जाते हैं। हिंदुओं में अपना वर्चस्व कायम करने की कोई आकांक्षा नहीं है, लेकिन लक्ष्य हासिल करने के लिए एकसाथ सोचकर बहादुरी से काम करना ही होगा। हिंदू समाज को जीवन के हर पहलू में मजबूत होना होगा।'

'हम लोग तो कभी कीड़े को भी नहीं मारते'

'हम लोग तो कभी कीड़े को भी नहीं मारते'

मोहन भागवत ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा, 'हमें एक दूसरे की बात को सम्मान देना होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सम्राट युधिष्ठिर ने कभी एक दूसरे की बात नहीं काटी, जिसके परिणामस्वरूप ही महाभारत के युद्ध में उन्हें विजय मिली। हिंदू धर्म में तो कीड़े को भी नहीं मारा जाता है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया जाता है। हिंदू कभी किसी का विरोध करने के लिए नहीं जीते। हालांकि कुछ ऐसे लोग हैं जो हमारा विरोध कर सकते हैं लेकिन आपको उन्हें नुकसान पहुंचाए बगैर उनसे निपटना होगा।'

सम्मेलन में 80 देशों के 2500 प्रतिनिधि

सम्मेलन में 80 देशों के 2500 प्रतिनिधि

आपको बता दें शिकागो में स्वामी विवेकानंद के 11 सिंतबर 1893 को दिए गए भाषण के 125 साल पूरे होने पर विश्व हिंदू कांग्रेस का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में 80 देशों के करीब 2500 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में भागवत ने कहा कि अहंकार पर विजय और आम सहमति को स्वीकार करने से ही पूरी दुनिया को एक साथ लाया जा सकता है। अपने मूल सिद्धांतों और आध्यात्मिकता को भूल जाने के कारण ही हमारा समाज इतने सालों से प्रताड़ित होता रहा है।

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