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अब इस काम के लिए पति की इजाजत जरूरी नहीं? मद्रास हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला जो हर महिला को जानना चाहिए!

Madras High Court News: महिलाओं के अधिकारों को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने पति की अनुमति जैसी पितृसत्तात्मक परंपरा पर करारा प्रहार किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि शादी के बाद भी महिला अपनी व्यक्तिगत पहचान नहीं खोती और पासपोर्ट जैसी जरूरी सुविधा के लिए उसे किसी की इजाजत लेने की जरूरत नहीं।

क्या था मामला?
यह मामला जे. रेवती नामक महिला का था, जिनकी शादी 2023 में हुई थी और अगले ही साल उनके वैवाहिक जीवन में विवाद शुरू हो गया। पति ने तलाक की अर्जी दाखिल कर दी थी। इस दौरान रेवती ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया लेकिन चेन्नई के पासपोर्ट ऑफिस ने पति की अनुमति और हस्ताक्षर की शर्त रख दी, जिससे रेवती को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश की बेंच ने इस मामले में कहा कि पति की अनुमति मांगना महिला को पति की संपत्ति समझने जैसा है और यह मानसिकता महिला सशक्तिकरण के खिलाफ है। कोर्ट ने इस प्रथा को पुरुष प्रधान मानसिकता (Male Supremacism) का उदाहरण बताया और कहा कि यह आज के आधुनिक समाज के लिए शर्मनाक है।

अब आगे क्या होगा?
कोर्ट ने पासपोर्ट ऑफिस को निर्देश दिया कि रेवती के आवेदन को बिना पति की अनुमति की जरूरत के प्रोसेस किया जाए और चार हफ्ते में पासपोर्ट जारी किया जाए। कोर्ट का यह फैसला महिलाओं के व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करने वाली नजीर बन सकता है।

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