म्‍यांमार में खतरनाक आतंकी खापलांग की मौत, जानिए भारत के लिए क्‍यों है यह एक गुड न्‍यूज

नई दिल्‍ली। शुक्रवार को म्‍यांमार से एक ऐसी खबर आई है जो निश्चित तौर पर भारत और भारतीय सेना के लिए 'गुड न्‍यूज' है। 77 वर्ष की उम्र में एसएस खापलांग की मौत हो गई। अगर आप नहीं जानते हैं कि खापलांग कौन था तो आपको बता दें कि खापलांग नागालैंड के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन एनएससीएन-के का लीडर था। म्‍यांमार में छिपकर रह रहे खापलांग ने शुक्रवार को 77 वर्ष की उम्र में दम तोड़ दिया।

म्‍यांमार में खतरनाक आतंकी खापलांग की मौत, जानिए भारत के लिए क्‍यों है यह एक गुड न्‍यूज

भारत के साथ तोड़ युद्धविराम

कुछ वर्षों पहले खापलांग ने भारत के साथ युद्धविराम समझौता तोड़ दिया था। वर्ष 2015 में मणिपुर के चंदेल जिले में सेना के काफिले पर आतंकी हमला हुआ और उसमें 18 सैनिक शहीद हो गए थे। खापलांग ही इस आतंकी हमले का मास्‍टरमाइंड था। खापलांग म्‍यांमार का नागरिक था और उसने उल्‍फा (आई) के साथ अपने संबध तोड़ लिए थे। इसके बाद उसने फैसला किया था कि नॉर्थ ईस्‍ट में अकेले ही युद्ध लड़ेगा। वर्ष 2014 तक माना जाता था कि वह भारत के रास्‍तों पर चल रहा था लेकिन उसी समय फैसला लिया कि अब नॉर्थ ईस्‍टर्न मिलिटेंट ग्रुप्‍स के लिए एक संगठन की जरूरत है। खापलांग को भारत ने एक आतंकी घोषित कर दिया और फिर उसने म्‍यांमार में शरण ले ली। वह तब से ही एनएससीएन-के पर अपना नियंत्रण बनाए हुए था। खापलांग ने भारत के साथ किसी भी तरह की शांति वार्ता से भी इनकार कर दिया था। भारतीय एजेंसियों से बचने के लिए वह म्‍यांमार के टागा से चीन के युनान प्रांत आता रहता था। कहा जाता था कि वह उल्‍फा के प्रकाश बरूआ के संपर्क में है जिसे कई बार युनान प्रांत में देखा गया था।

एक बड़े आतंकी संगठन की वकालत करता खापलांग

खापलांग पर आए एक डॉजियर में कहा गया था कि खापलांग एक समर्पित नेता था। उसने यह बात सुनिश्चित की हुई थी कि वह अपने कैडर्स के लिए हमेशा उपलब्‍ध रहे। वह नॉर्थ ईस्‍ट का सबसे प्रभावी नेता था। खापलांग का प्रभाव किस कदर था इसे सिर्फ इस बात से ही समझा जा सकता है कि उसने यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ वेस्‍टर्न साउथ इंडिया की स्‍थापना कर डाली थी जिसने इस समय नॉर्थ ईस्‍ट के आतंकी संगठनों जैसे उल्‍फा, एनडीएफबी और केएलओ समेत कई आतंकी संगठनों को शरण दी हुई है। खापलांग हमेशा से सारे संगठनों के लिए संगठन बनाने की वकालत करता था। हालांकि हमेशा यूनाइटेड नेशनल लिब्रेशन फ्रंट के नेता आरके मेघन ने उसका विरोध किया। मेघन इस समय जेल में है और खापलांग हमेशा से ही उसके रास्‍ते में बाधा था। मेघन ने जेल से अपने फॉलोअर्स को कई मैसेज भेजे और कहा कि वे खापलांग को संगठन का नेता न बनने दें।

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