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Ravan: रामायण के 'रावण' अरविंद त्रिवेदी क्यों नहीं कर पाए थे अयोध्या में हनुमान गढ़ी के दर्शन?

भगवान श्रीराम आज के दिन रावण का वध कर अयोध्या वापस लौटे थे। प्रभु राम की घर वापसी के उपलक्ष्य में पूरे देश में आज के दिन विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है। जब हम श्रीराम से जुड़ी लीलाओं की बात करते हैं तो हमें रामानंद सागर कृत 'रामायण' याद आ जाती है।

रामानंद सागर की रामायण भारत में इतनी लोकप्रिय हुई थी, कि उसके एक्टरों को आज भी लोग नहीं भुला पाए हैं। इसी रामायण में राणव का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी का 6 अक्टूबर 2021 में निधन हो गया था। अरविंद त्रिवेदी को उनके किरदार के लिए आज भी याद किया जाता है।

Ramayanas Ravana Arvind Trivedi

रामायण में अरविंद त्रिवेदी ने रावण के किरदार को बेहद ही शानदार तरीके से निभाया था। उनके शानदार अभिनय के चलते अरविंद को दर्शक असली लंकापति रावण समझने लगे थे। जिसके चलते उन्हें असल जिंदगी में कई बार परेशानियों का भी सामना करना पड़ा था। यहां तक की लोग उनसे नफरत करने लगे थे।

एक ऐसा ही किस्सा हम आज आपके साथ साझा करने जा रहे हैं। रामायण धारावाहिक के दौरान राम और रावण के बीच हुए संवाद में कई बार रावण को भगवान का अपमान करना पड़ा था। सीरियल में उन्होंने भगवान राम को 'मरकट' और 'वन वन भटकता वनवासी' कहकर संबोधित किया था।

जिसका खामियाजा अरविंद त्रिवेदी को असल जिंदगी में उठाना पड़ा था। बात 1994 की है, अरविंद त्रिवेदी योध्या के हनुमान गढ़ी में संकट मोचन के दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। वहां के पुजारी रेवती बाबा जब पता चला कि, रामायण में रावण का किरदार निभाने वाला शख्स हनुमान के दर्शन के लिए आए हैं। तो पुजारी ने अरविंद को हनुमानजी के दर्शन नहीं करने से इनकार कर दिया।

प्रमुख पुजारी रेवती बाबा को बताया गया कि, वह असल में रावण नहीं है, उन्होंने सिर्फ किरदार निभाया था। लेकिन रेवती बाबा इस बात पर अडिग हो गए थे कि इन्होंने भगवान राम का बार-बार अपमान किया है, इसलिए मैं इन्हें दर्शन नहीं करने दूंगा। पुजारी रेवती बाबा से अरविंद ने बार-बार प्रार्थना की लेकिन वह नहीं माने, जिसके बाद एक्टर को बिना दर्शन के ही घर वापस लौटना पड़ा। यहां तक की प्रशासन भी रेवती बाबा को मानने में लगा रहा, लेकिन वह टस से मस भी नहीं हुए।

बता दें कि असल जिंदगी में अरविंद त्रिवेदी भगवान राम के बहुत बड़े भक्त थे। हनुमान के दर्शन ना कर पाने का अरविंद त्रिवेदी को बहुत बुरा महसूस हुआ। उनके अंदर ये बात घर कर गई कि उन्होंने भगवान राम को अपशब्द कहकर अपमान किया है। इसका प्रायश्चित करने के लिए अरविंद त्रिवेदी ने अपने घर की दीवारों पर रामायण के दोहे और चौपाइयां लिखवा डाली थीं। इतनी ही नहीं उन्होंने घर के बाहर 'श्री राम दरबार' का बड़ा-सा बोर्ड लगवा लिया था। उनके घर हर साल रामायण की पाठ होता था।

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