भारत में अफजल गुरु पर एक नोट के साथ दाखिल होते आतंकी

नई दिल्‍ली। मौत के तीन वर्ष बाद फिर से संसद हमले के आरोपी अफजल गुरु पर चर्चाएं हो रही हैं और हर ओर उसका जिक्र हो रहा है। वजह है जेएनयू विवाद जो कि 10 दिन से जारी है। अजफल गुरु इस समय पाकिस्‍तान से भारत में दाखिल होने वाले आतंकियों का आदर्श बन गया है।

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आतंकियों के पास होती है एक किट

जिस समय आतंकवादी, पाकिस्‍तान से भारत में दाखिल होते हैं, उनके पास एक किट होती है। इस किट में हथियार, खाने का जरूरी सामान, पानी और कम्‍यूनिकेशन के लिए सभी जरूरी डिवाइसेज होती हैं।

अब इन सभी सामानों के साथ ही आतंकियों के पास एक नोट भी होता है। इस नोट में लिखा रहता है, 'हम अफजल गुरु की फांसी की निंदा करते हैं।'

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इस तरह के नोट वाली चि‍ट्ठियां अफगानिस्‍तान के मजार-ए-शरीफ के साथ ही पठानकोट में हुए आतंकी हमले में भी एजेंसियों को मिली थीं।

जम्‍मू कश्‍मीर में हुए हमलों में मिले सुबूत

जांचकर्ताओं को जम्‍मू के कठुआ शहर स्थित राजबाग की एक पुलिस चौकी पर हुए हमले के दौरान भी इस तरह के नोट मिले थे। यह हमला 20 मार्च 2015 को हुआ था।

जांचकर्ताओं के मुताबिक 21 मार्च 2015 को सांबा में हुए हमले के दौरान भी इस तरह की चिट्ठियां उनके हाथ लगी थीं।

इस तरह की सभी चिट्ठियों को अफजल गुरु स्‍क्‍वाड की ओर से साइन किया गया था। ऐसे में यह साफ है कि पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठन समय-समय पर अफजल गुरु का मुद्दा उठाते रहते हैं।

साथ ही इसके जरिए वह इस बात को भी सुनिश्चित करते हैं कि अफजल को कश्‍मीर के आदर्श में तब्‍दील कर दिया जाए।

घाटी में पुराने दिन लौटाने की साजिश

80 के दशक में जब मकबूल भट को फांसी दी गई थी जो उस समय भी जेकेएलएफ के फाउंडर के नाम का प्रयोग करके हालात बिगाड़ने की कोशिश की गई थी।

वर्ष 1989 में कश्‍मीर घाटी के जो हालात थे वह आज भी किसी से छिपे नहीं हैं।उन दिनों की ही तरह अब अफजल गुरु के नाम का प्रयोग होने लगा है।

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जांचकर्ताओं के मुताबिक यह अब एक पैटर्न जैसा बन गया है। अफजल गुरु को पाकिस्‍तान के एक नहीं बल्कि कई आतंकी संगठनों ने मिलकर तैयार किया था न कि किसी एक व्‍यक्ति के संगठन ने।

इन संगठनों में जैश-ए-मोहम्‍मद से लेकर लश्‍कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन शामिल हो सकते हैं।इन घटनाओं के साथ ही कश्‍मीर में एक और बड़े तनाव को अंजाम देने की तैयारी थी।

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