आखिर क्यों इस बार गर्मी में तापमान कम है, जानिए इसकी वजह
नई दिल्ली। पूरा देश और दुनिया इस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन लॉकडाउन के बीच देश में इस बार गर्मी के माह में तापमान सामान्य से कम है। हालांकि कम तापमान होने की वजह से आप खुश जरूर होंगे, लेकिन मानसून और देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह अच्छी खबर नहीं है। दरअसल मई-जून माह में पड़ने वाली गर्मी सीधे तौर पर मानसून को प्रभावित करती है, यानि जितनी कम गर्मी होगी मानसून की बारिश उतनी ही कम होगी।
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मार्च, अप्रैल, मई में बारिश का रिकॉर्ड टूटा
इस वर्ष मई माह में भी तापमान कम होने की बड़ी वजह है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानि पश्छिम विक्षोभ। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश, ओले, आंधी, तूफान आता है और यह सामान्य तौर पर जनवरी, फरवरी, मार्च तक ही रहता है। मार्च माह के बाद यह खत्म हो जाता है और तापमान बड़ने लगता है। मौसम विभाग के अनुसार मार्च और अप्रैल के माह में 354 बार भारी बारिश हुई है, यानि 56.5 मिलिमीटर से अधिक की बारिश हुई है, जिसे साफ है कि यह सामान्य स्थिति से अलग है।

आधा भारत बारिश की संभावना वाले जोन में
मौसम विभाग के 13 मई के अनुमान को देखें तो उसके अनुसार तकरीबन आधा भारत येलो या फिर ऑरेंज जोन में आ है, यानि यहां भारी बारिश की संभावना है। हम आप सभी लोग इसको महसूस कर रहे हैं। दिल्ली, यूपी, बिहार, सहित तमाम राज्यों में भारी बारिश और ओले गिरे हैं। यहां तक कि मई के महीने में भी हिमाचल और शिमला में बर्फ गिर रही है, जोकि सामान्य तौर पर नहीं होता है।

सामान्य से तापमान 3-4 डिग्री कम
मौसम विभाग न 1 अप्रैल को अपने अनुमान में कहा था कि इस बार गर्मी का मौसम तकरीबन 1 डिग्री ज्यादा गर्म होगा। अप्रैल. मई, जून माह का तापमान आधे से एक डिग्री ज्यादा होगा। लेकिन इससे उलट उत्तर भारत में औसत तापमान तकरीबन 4-5 डिग्री कम है। पिछले वर्ष अप्रैल माह में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक था, जबकि न्यूनतम 24 के आसपास था, जबकि इस वर्ष मई में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जबकि न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के आसपास है। पिछले वर्ष की तुलना में 3-4 डिग्री का अंतर है।

क्या है पश्चिमी विक्षोभ
लगातार बारिश, आंधी, तूफान की वजह से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। इसकी वजह वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानि पश्चिम विक्षोभ है। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर व कैस्पियन सागर से होकर भारत पहुंचने वाला एक तरह का अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान है। यह एक तरह का तूफान है जो ईरान, अफगानिस्तान होते हुए भारत आता है। जब यह हिमालय पर पहुंचता है तो भारी बारिश व बर्फबारी होती है। लेकिन यह मानसून की बारिश नहीं होती है। पश्चिमी विक्षोभ के बारे में सटीक तौर पर बता पाना काफी मुश्किल होता है।

यूरोप-एशिया में तापमान अधिक
पूरे यूरोप और एशिया में तापमान सामान्य से अधिक है, हालांकि भारत में ऐसा नहीं है, लेकिन अन्य देशों में तापमान अधिक है। याद रखने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष ही तमाम वैज्ञानिकों की ओर से कहा गया था कि 2020 सबसे गर्म साल होगा। हालांकि आप सोच रहे होंगे कि गर्मी कम है तो यह अच्छी बात है, पंखे की हवा से ही हमे ठंडी हवा मिलती है। यह आपके लिए व्यक्तिगत तौर पर अच्छी बात हो सकती है, लेकिन देश में आने वाले मानसून के लिए यह कतई अच्छी बात नहीं है।

मानसून है देश का वास्तविक वित्त मंत्री
देश में मानसून उतनी ही तेजी से आता है उतनी ही तेजी से मानसून देश में आता है, हमारे देश में मई-जून का तापमान अधिक होना बहुत जरूरी है, जबतक भूभाग गर्म नहीं होता है तबतक मानसून की हवा नहीं चलती हैं। ऐसे में अगर गर्मी औसत से कम होती है तो बारिश भी औसत से कम होगी, जिसका सीधा असर फसलों पर पडे़गा। फसल कम होगी तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि देश में मानसून को ही देश का सच्चा वित्त मंत्री कहा जाता है।












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