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सोनिया को ट्रंप के साथ डिनर में क्यों नहीं बुलाया, सरकार ने बताया

नई दिल्ली- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिनर में कांग्रेस पार्टी के कोई भी नेता नहीं पहुंचे थे। तब कांग्रेस के जिन नेताओं को इसके लिए आमंत्रित किया गया था, उन्होंने ये कहकर आने से मना कर दिया था कि जब उनकी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को नहीं बुलाया गया है, फिर वे कैसे पहुंच सकते हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस को नहीं भूलना चाहिए कि यूपी सरकार में जॉर्ज बुश और ओबामा की डिनर में भी तत्कालीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्षों को नहीं बुलाया गया था, जबकि वह लोकसभा में मान्यताप्राप्त प्रमुख विपक्षी दल के नेता थे। बता दें कि सरकार की ओर से इस डिनर के लिए पूर्व प्रधानमंत्री की हैसियत से मनमोहन सिंह, लोकसभा में कांग्रेस के नेता होने के नाते अधीर रंजन चौधरी और राज्यसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को बुलाया गया था। लेकिन, उन्होंने सोनिया को नहीं बुलाने से नाराज होकर राष्ट्रपति के भोज का बहिष्कार कर दिया।

कांग्रेस पर लगाया हल्की राजनीति करने का आरोप

कांग्रेस पर लगाया हल्की राजनीति करने का आरोप

बुधवार को सरकार की ओर से केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि " (ट्रंप)उनके सम्मान में एक राष्ट्रीय भोज दिया गया था और कांग्रेस पार्टी नहीं गई। इसलिए कि उनके दोनों सदनों के नेता लोकसभा के और राज्यसभा के और पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस पार्टी के मनमोहन सिंह इसलिए नहीं गए कि सोनिया गांधी को नहीं बुलाया गया। क्या मतलब है इसका ? क्या जिस समय पूरे देश को एक स्वर में एक इतने महत्वपूर्ण विदेशी मेहमान के स्वागत में रहना चाहिए राष्ट्रपति भवन के भोज में जो राजकीय भोज है,तब भी आप हल्की राजनीति करेंगे ?"

'परिवार के सामने देशहित पीछे'

'परिवार के सामने देशहित पीछे'

यही नहीं उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वो अपना जमाना भूल चुकी है? उन्होंने कहा, "मैं उनसे एक सवाल पूछना चाहता हूं। यूपीए के सरकार में प्रेसिडेंट बुश आए थे न? और 2010 में प्रेसिडेंट ओबामा भी आए थे, क्या उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों को यूपीए सरकार ने बुलाया था? राजनाथजी अध्यक्ष थे और नितिन गडकरी अध्यक्ष थे। और इस बात को कभी न भूला जाय कि भाजपा मान्यताप्राप्त विपक्ष थी। आज कांग्रेस पार्टी मान्यताप्राप्त विपक्ष नहीं है, लोकसभा में। इसका क्या मतलब है ?.....राजकीय भोज का बहिष्कार किया तो कांग्रेस पार्टी से और क्या अपेक्षा की जा सकती है कि और कुछ देख ही नहीं सकते। परिवार की आशक्ति है। परिवार के सामने कई बार देशहित भी पीछे पड़ जाता है।"

एक पुराने मामले को लेकर भी साधा निशाना

एक पुराने मामले को लेकर भी साधा निशाना

यही नहीं उन्होंने एक पुराना वाक्या पेश करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधने की कोशिश की। रविशंकर प्रसाद ने कहा "एक बार 26 जनवरी को राहुल गांधी को दूसरी पंक्ति में बिठाया गया था तो भी बहुत हंगामा किया गया था। जबकि, यूपीए काल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को 8वीं पंक्ति में बिठाया गया था। तब तो भाजपा ने कोई हंगामा नहीं किया था। अगर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को नहीं बुलाया गया तो ये उनकी सोच थी। उस समय विपक्षी नेताओं को बुलाया गया था।" बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए थे। उनके सम्मान में मंगलवार को उनके स्वदेश रवाना होने से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रभवन में डिनर का आयोजन किया था। लेकिन, सोनिया गांधी को नहीं बुलाया गया, इसलिए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता सदन अधीर रंजन चौधरी ने जाने से साफ मना कर दिया।

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