आखिर क्यों फिर से नहीं बन सकी पीके-कांग्रेस में बात, इन वजहों ने किए रास्ते अलग
नई दिल्ली, 27 अप्रैल। प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। उन्होंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस दौरान प्रशांत किशोर ने प्रेजेंटेशन के जरिए पार्टी को फिर से नई पहचान देकर उसे चुनाव में जीत का फॉर्मूला दिया था। लेकिन लंबे समय तक चली इस बातचीत का आखिरकार कोई नतीजा नहीं निकला और अब एक बार फिर से प्रशांत किशोर को कांग्रेस में शामिल करने की कवायद फेल हो गई। खुद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेलवाला ने इस बात की जानकारी दी।
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नई कांग्रेस तैयार करना चाहते थे पीके
दरअसल प्रशांत किशोर चाहते थे कि पार्टी के भीतर बड़ा बदलाव किया जाए। संगठन स्तर पर बड़ा उलटफेर करने के पक्ष में थे प्रशांत किशोर। वह पार्टी के भीतर एक अहम भूमिका चाहते थे थे, लेकिन कांग्रेस शायद इसके लिए तैयार नहीं थी, वह पार्टी को पूरी तरह से बदलने के पक्ष में नहीं थी और माना जा रहा है कि यही वजह रही जिसके चलते प्ऱशांत किशोर ने पार्टी से दूरी बना ली। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पिछले साल भी प्रशांत किशोर ने इसी तरह की बैठकें की थी, इस बार सोनिया गांधी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को इस बातचीत में शामिल किया, उनके सुझाव पर काम किया और फैसला लिया कि वह उन्हें भविष्य के चुनाव में हार या जीत के लिए जिम्मेदार ठहराएंगी।

बड़े बदलाव के लिए नहीं तैयार कांग्रेस
पार्टी के शीर्ष नेता ने इस बात से इनकार किया है कि प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच एक राय इसलिए नहीं बन पाई क्योंकि प्रशांत किशोर टीआरएस जसे दलों के साथ जुड़े थे। बता दें कि टीआरएस चीफ के चंद्रशेखर राव ने प्रशांत किशोर की कंपनी आई-पैक के साथ अगले साल के चुनाव के लिए डील की है। प्रशांत किशोर इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के साथ भी काम कर चुके हैं, लेकिन कांग्रेस-पीके का गठजोड़ ना बन पाना यह वजह नहीं रही है। कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच एक राय नहीं बन पाने की बड़ी वजह यह थी कि आखिर कैसे पीके पार्टी की फिर से खड़ा करेंगे। पीके चाहते थे कि पार्टी के भीतर विघटन हो, पार्टी के भीतर नए सिरे से लोगों को जिम्मेदारी दी जाए, जबकि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं थी।

2017 के अनुभव को भूल नहीं पाए हैं प्रशांत
कांग्रेस इस बात को लेकर ज्यादा कतई राजी नहीं थी कि पार्टी को किसी बाहरी व्यक्ति के हाथो सौंपा जाए, वह पार्टी की कमान किसी भी बाहरी व्यक्ति को नहीं देना चाहती थी, जबकि प्रशांत किशोर 2017 के यूपी चुनाव में पार्टी की दुर्गति को देख चुके थे। लिहाजा वह इससे कम के लिए तैयार नहीं थे। कई दौर की बातचीत, प्रेजेंटेशन, दोनों पक्षों के बीच मुद्दों पर चर्चा के बाद माना जा रहा था कि इस बार पीके कांग्रेस के साथ पूर्णकालिक तौर पर जुड़ जाएंगे, लेकिन मंगलवार को साफ हो गया है कि दोनों के रास्ते अलग हैं और आपसी सहमति नहीं बन सकी है।

बहुत सतर्कता से किया गया ऐलान
पार्टी के एक शीर्ष नेता ने बताया कि प्रशांत किशोर और नेतृत्व के बीच बैठक हुई थी, जिसके बाद यह तय हुआ कि दोनों एक राय पर नहीं राजी हो सके। इसके बाद ही रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी कि प्रशांत किशोर पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं। लेकिन इस ट्वीटर में इस बात का ध्यान रखा गया कि किसी भी तरह के तल्ख शब्दों का इस्तेमाल नहीं हो।

इस वजह चलते नहीं बन सकी बात
कांग्रेस की बात करें तो वह प्रशांत किशोर को एक अहम सदस्य के तौर पर जोड़ना चाहती थी जो बातचीत में हिस्सा लें और अपनी राय रखें, इम्पॉवर्ड एक्शन ग्रुप का सदस्य बनाने के पक्ष में थी पार्टी। लेकिन प्रशांत किशोर ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इससे पहले जब कांग्रेस के साथ पीके की बात चल रही थी तो प्रशांत किशोर ने कहा था कि मैं अपनी बात करूं तो 2017 में यूपी में मेरा अनुभव उनके साथ अच्छा नहीं रहा था। लिहाजा इस बार में थोड़ा ज्यादा सतर्क था, मैं अपने हाथ बंधे हुए नहीं चाहता हूं, कांग्रेस नेतृत्व का यह संदेह जायज है कि मैं उनके प्रति 100 फीसदी विश्वसनीय रहूंगा या नहीं। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर पूरी तरह से भरोसा करने में विफल रहे।












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