स्मगलिंग माफिया ने ही दी थी 26/11 के समय कसाब को शरण
बेंगलुरु। पोरबंदर में हुई घटना के बाद से ही कई मीडिया हाउस और कई राजनीतिक पार्टियां इस बात को जोर देकर कह रही है कि जिस नाव को कोस्ट गार्ड ने पकड़ा था और जो कराची के केती बंदरगाह से आई थी, वह दरअसल ड्रग या फिर डीजल स्मगलर्स की नाव हो सकती है। जो लोग डीजल स्मगलिंग की बात कर रहे हैं वह यह भी भूल रहे हैं कि 26/11 में जिस कसाब ने 160 से भी ज्यादा लोगों की जान ले ली थी, उसे एक डीजल स्मगल करने वाली महिला ने ही शरण दी थी।

पाक की ओर से स्मगलिंग भी आतंकी खतरा
- भारत और पाक के बीच डीजल की स्मगलिंग चलती रहती है।
- भारत में डीजल पाक की तुलना में 30 रुपए सस्ता है।
- कोई पाक से 86 रुपए प्रति लीटर वाला डीजल स्मगल करके भारत में 56 रुपए प्रति लीटर के मूल्य पर क्यों बेचेगा?
- 26/11 के हमले के समय कसाब और नौ आतंकियों को जिस महिला ने शरण दी थी, वह दरअसल डीजल के स्कैम से ही जुड़ी थी।
- यह वहीं महिला थी जो भारत और पाक के बीच डीजल की स्मगलिंग को अंजाम देती आ रही थी।
- अगर पोरबंदर की घटना ड्रग स्मगलिंग से जुड़ी होती तो स्मगलर पकड़े जाने के डर से समंदर में सामान को फेंक देते।
- विशेषज्ञों की मानें तो आग लगाने की तुलना में पानी में सामान को फेंकना ज्यादा सुरक्षित होता है।
- 10 में से आठ केसों में कोस्ट गार्ड को इस बात के सुबूत मिले हैं कि ड्रग स्मगलर अक्सर सामान को पानी में फेंक देते हैं।
- अगर ये स्मगलर कोस्ट गार्ड से घिर जाते हैं तो भी वह नाव को आग कभी नहीं लगाते हैं।
जांचकर्ताओं को नहीं कोई शक
इस बात पर जांचकर्ताओं को कोई शक नहीं है कि नाव में जो भी सामान था वह एक्सप्लोसिव था। एजेंसियों ने बिना किसी शक और शुबहे के इस एक बात की पुष्टि की है। हालांकि अभी यह बात साफ नहीं हो सकी है कि नाव में सवार चार लोग क्या पोरबंदर स्थित नेवी बेस पर खुद को ब्लास्ट करने के मकसद से आए थे या फिर वह यहां पर हथियारों को ड्रॉप करने के लिए पहुंचे थे।












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