आतंकियों को पाकिस्तानी बताने में क्यों हिचक रही है सेना
नई दिल्ली। रविवार को उरी आतंकी हमले ने हर किसी को सन्न करके रख दिया है। पिछले 26 वर्षों में सेना पर हुआ यह अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला करार दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार के मंत्री और अधिकारी तो हमले में पाकिस्तानी आतंकियों के होने की बात कर रहे हैं लेकिन डीजीएमओ की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इन्हें पाकिस्तान की जगह 'विदेशी आतंकी' कहकर संबोधित किया गया।

क्या था बयान में
डीजीएमओ ने रविवार को इस आतंकी हमले के बाद बयान जारी किया गया। चार पेज के इस बयान में पहले पेज में लिखा था हमले के बारे में लिखा था। सेना की ओर से जानकारी दी गई कि सुबह 8:30 बजे तक आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई और चार आतंकी मारे गए।
इसके बाद की अगली लाइन में लिखा है, 'मारे गए सभी चारों आतंकी विदेशी थे और उनके पास से जो सामान मिला है उस पर पाकिस्तान का झंडा लगा है।' बयान में जहां आतंकियों को 'विदेशी आतंकी' कहा गया है तो अगली ही लाइन में उन्हें जैश का आतंकी भी बताया गया है।
क्यों हुआ ऐसा
कर्नल आरडी बाली (रिटायर्ड) से हमने इस बारे में जानने की कोशिश की तो उनका जवाब था 'राजनीतिक दबाव।' उन्होंने कहा कि आतंकियों को पाक में ही ट्रेनिंग मिली और ऐसे में इस बात को स्वीकारने में हिचक क्यों है, यह बात समझ से परे है। कर्नल बाली की मानें तो यह छोटी-छोटी बातें सेना के मनोबल पर विपरीत असर डालती हैं।
उन्होंने कहा की जब आप विदेश आतंकी कहते हैं तो इसका मतलब कुछ भी हो सकता है। आतंकी अफगानिस्तान से भी आए हो सकते हैं और यहां तक कि हो सकता है कि वे आईएसआईएस से हो, लेकिन जब आप एक तरफ पाकिस्तान की बात करते हैं तो फिर इस बात को खुलकर कहना होगा कि आतंकी पाकिस्तानी थे न कि विदेशी।












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