तीन तलाक : जानें! सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शुरुआत में क्यों बनी भ्रम की स्थिति
नई दिल्ली। कई सालों से ट्रिपल तलाक पर छिड़ी जंग को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस जे एस खेहर समेत सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यीय खंडपीड में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया। और तत्काल प्रभाव से इस पर रोक लगाने के आदेश दे दिए। लेकिन शुरुआत में फैसले को लेकर कन्फ्यूजन हो गया। आइये जानते हैं आखिर क्यों हुआ कन्फ्यूजन..

चीफ जस्टिस खेहर ने पहले पढ़ा अपना फैसला
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मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर के दस मिनट तक फैसला पढ़ने के दौरान ज्यादातर मीडिया संस्थानों ने भ्रमित होकर अपनी रिपोर्ट में तीन तलाक को जायज बता दिया साथ ही यह भी रिपोर्ट दिखा दी कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार तीन तलाक पर कानून बनाने का दारोमदार पूरी तरह सरकार पर है। हालांकि तीन तलाक को जायज बताना चीफ जस्टिस खेहर का निजी फैसला था। बाद में मुख्य न्यायाधीश के फैसला पूरी तरह से पढ़ने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक को असंवैधानिक बताया है। जिसके बाद दस मिनट के अंदर ही फैसले की तस्वीर साफ हो गई और मीडिया संस्थानों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक किए गए फैसले की फाइनल रिपोर्ट दिखाई।
क्यों हुआ कन्फ्यूजन
दरअसल हुआ यूं कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश होने के नाते जस्टिस जे एस खेहर ने अपना फैसला पहले पढ़ा जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर तीन तलाक को जायज ठहराते हुए सरकार को निर्देश दिए थे कि वह इसे लेकर कानून बनाए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यीय खंडपीड में से चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक को जायज ठहराया था। हालांकि फैसला पूरा पढ़ने के बाद इसकी तस्वीर साफ हो गई क्योंकि तीन अन्य जजों जस्टिस कुरियन जोसेफ, आर नरीमन और यू यू ललित ने तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराया था। पांच में से तीन जजों का तीन तलाक के विपक्ष में फैसला देने पर अंतिम रूप में यही फैसला सर्वमान्य हुआ।












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