साल 2014 को पूरी तरह भुलाना चाहेंगी ममता बनर्जी, पर क्यों?
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। ममता बैनर्जी साल 2014 को भूलना चाहेंगी। हालांकि इस साल हुए लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी की अखिल भारतीय स्तर चल रही हवा के बावजूद तृणमूल कांग्रेस को अपेक्षित सफलता मिली, पर सारधा घोटाले के चलते ममता दी की दिक्कतें बढती गईं। इस घोटाले की छाया उनके अपने मंत्रियों और दूसरे नेताओं पर भी पड़ रही है। इसके चलते ममता परेशान है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस संकट से कैसे निकला जाए।

केन्द्र से ना लें पंगा
बेहतर होगा कि ममता बैनर्जी केन्द्र सरकार के साथ दो-दो हाथ करना छोड़कर राज्य को विकास के रास्ते पर लेकर जाएं। बेहतर यह भी होगा कि वे शांत रहे। बात-बात पर गुस्सा करना छोड़ दें।
विरोध सड़क से संसद तक
सारधा घोटाले में ममता सरकार में मंत्री परिवहन व खेल मंत्री मदन मित्र को गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है । पार्टी के सांसद सड़क से लेकर संसद तक में हंगामा कर रहे हैं।
केन्द्र और सीबीआई से नाराज दीदी
इस ताजा गिरफ्तारी के चलते ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सीबीआई के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए केंद्र को चुनौती दी है कि ‘अगर उनमें हिम्मत है, तो मुझे गिरफ्तार करके दिखायें।' जानकारों का कहना है कि सारधा घोटाले के कारण ममता बैनर्जी की ईमानदारी पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अपने को ईमानदार बताने वाली ममता के साथ इतने भ्रष्ट लोग कहां से आ गए।

ममता के पीछे पड़ी पार्टियां
ममता के पीछे अब राज्य की राजनीतिक पार्टियां भी पीछे पड़ गई हैं। उनका कहना है कि अब ममता बनर्जी को नैतिकता के आधार पर शीघ्र ही अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए ।
बर्बाद हुए निवेशक
दरअसल अप्रैल 2012 में सारधा चिटफंड कंपनी घोटाले का मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल में भूचाल आ गया है। इसके निवेशक बर्बाद हो गए। सारधा चिटफंड घोटाला सामने आने के बाद से अब तक 76 लोगों ने आत्महत्या कर ली है। इसमें तो कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने जीवन की पूरी पूंजी इसमें लगा दी थी। वे इस घोटाले को बरदाश्त नहीं कर पाये और मौत को गले लगाना ही उचित समझा।
कायदे से देखा जाए तो ममता बैनर्जी को सारधा घोटाले के दोषियों को पकड़वाने में पुलिस की मदद करनी चाहिए थी, पर ममता तो सीबीआई पर ही आरोप लगाने लगीं।
निवेश कहां से आएगा दरअसल ममता बैनर्जी के प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि वहां पर निवेश का माहौल बनेगा। पर, अफसोस यह हो ना सका। हालात पहले से भी बदत्तर हो गए। अब यह देखने वाली बात है कि ममता का अगला कदम क्या होता है।
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