ममता बनर्जी को क्यों थाम लेना चाहिये नरेंद्र मोदी का हाथ
नई दिल्ली (ब्यूरो)। वो ममता बनर्जी जो कभी पेट्रोल के दाम बढ़ते ही आग बबूला हो जाती थीं, रेल किराया बढ़ते ही यूपीए सरकार के खिलाफ तेज़ हॉर्न बजाने लगती थीं, आजकल शांत बैठी हैं। उनकी शांति का एक कारण पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी है, जिन्हें निभाना ही है और दूसरा नरेंद्र मोदी!
अरे यह नरेंद्र मोदी की बात कहां से आ गई। आपका सोचना लाजमी है, लेकिन मोदी के लगातार प्रभावशाली भाषणों ने ममता बनर्जी का भी रातों का चैन छीन लिया है। ममता इस समय इस सोच में पड़ी हैं कि 2014 में वो किसका साथ दें- वापस यूपीए का, जो हो नहीं सकता; तीसरे मोर्चे का, उसमें माया-मुलायम घात लगाये बैठे हैं और एनडीए का, जहां मोदी देश को बदलने की राह पर चल चुके हैं। बहुत जल्द मोदी की रैली कोलकाता में होनी है, लिहाजा मोदी उनके गढ़ में आयेंगे, अब यह देखने वाला होगा कि ममता बतौर मुख्यमंत्री उनका स्वागत करती हैं, या बतौर तृणमूल लीडर उन्हें पीठ दिखा देती हैं।
हमारी सलाह यह है कि वो बतौर सीएम उनका स्वागत करें, ताकि आगे के राजनीतिक गलियारे में भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। सीधे शब्दों में कहें तो ममता को मोदी यानी यूपीए के साथ अब हो लेना चाहिये। इससे उन्हें सिर्फ राजनीतिक फायदे ही नहीं मिलेंगे, बल्कि पश्चिम बंगाल को भी एक नई दिशा मिलेगी।
मोदी का साथ क्यों दें ममता? जवाब स्लाइडर में तस्वीरों के सामने देखें-

ममता-मोदी दोनों एंटी कांग्रेस
कांग्रेस विरोधी होने के नाते ममता बनर्जी को अब एनडीए ज्वाइन कर लेनी चाहिये। और भूल कर भी यूपीए में बैकडोर एंट्री करने के बारे में नहीं सोचना चाहिये। ऐसा करने के लिये उन्हें सिर्फ राजनाथ सिंह से बात करनी होगी और बस एक हस्ताक्षर करते ही एंटी-कांग्रेस अभियान को नई शक्ति मिल जायेगी।

ममता के लिये कोई खतरा नहीं
एनडीए ज्वाइन करने के बाद एक भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है, जो उन्हें किसी भी प्रकार की धमकी दे, क्योंकि पश्चिम बंगाल में 184 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत में हैं, लिहाजा कोई उन्हें सरकार गिराने की धमकी नहीं दे सकता है।

नीतीश, मुलायम लेफ्ट में
जदयू के नीतीश कुमार और सपा के मुलायम सिंह यादव वाम दलों से जुड़ने की योजना बना रहे हैं, लिहाजा ममता के लिये यह सोचने का विषय है, क्योंकि ऐसा करने से लेफ्ट का बेस मजबूत हो सकता है, जिससे बंगाल में उनके लिये खतरा पैदा हो सकता है। लेकिन अगर वो एनडीए से जुड़ जाती हैं, तो सेफ रह सकती हैं।

मुलायम नहीं हैं मोदी
ममता बनर्जी को यह मालूम होना चाहिये कि नरेंद्र मोदी मुलायम सिंह यादव नहीं हैं, जो बात-बात पर पलट जायें और कभी भी एक नाव पर नहीं सवार हों।

वोटबैंक जरूरी
वोट बैंक के मसमले में ममता बनर्जी काफी मजबूत हैं, लेकिन कहीं न कहीं इस मजबूती को बरकरार रखना उनके लिये मुश्किल हो रहा है, अगर वो मोदी के साथ हो लें, तो बंगाल पर उनका कब्जा अगले 10 सालों तक सेफ हो जायेगा।












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