आखिर क्यों देश के फेमस नेशनल पार्कों को छोड़ कूनो को ही बनाया गया चीतों का 'घर'? कई मामलों में है खास
नई दिल्ली: धरती पर सबसे तेज दौड़ने वाला जीव चीता 70 साल पहले भारत से गायब हो गया था, लेकिन सरकार की कई सालों की मेहनत और करोड़ों की खर्च के बाद 8 चीते देश में आ गए हैं। मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क उनका नया 'घर' होगा। ये पार्क 748 वर्ग किलोमीटर में फैला है, इस वजह से वहां पर चीतों के लिए खास व्यवस्थाएं भी की गई हैं। उनके खाने के लिए वन विभाग ने बड़ी संख्या में चीतल को छोड़ा है, लेकिन लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा कि जब कई अन्य फेमस वन्य जीव अभ्यारण हैं, तो सिर्फ कूनो को ही चीतों के लिए क्यों चुना गया?
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इंसानी दखल नहीं
देश के ज्यादातर नेशनल पार्कों के बीच में पुराने गांव हैं, जिनकी वजह से जानवरों और इंसानों दोनों को परेशानी होती है। कूनो में भी पहले 24 गांव हुआ करते थे, लेकिन उनको बहुत पहले संरक्षित इलाके की सीमा से बाहर शिफ्ट कर दिया गया। ऐसे में चीतों का आमना-सामना इंसानों से बहुत कम होगा। इसके अलावा शिकार की दृष्टि से भी कूनो बहुत सुरक्षित इलाका है।

खाने के लिए बढ़िया व्यवस्था
चीता सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर है, लेकिन वो बड़े जानवरों पर हाथ नहीं डालता। उसके प्रमुख शिकार चीतल, हिरण जैसे छोटे जानवर हैं। खास बात ये है कि चीतल और हिरण की आबादी कूनो में बहुत ज्यादा है, ऐसे में चीता को इंसानों द्वारा खाना दिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वो आराम से छोटे जानवरों का शिकार कर लेंगे।

भौगोलिक स्थिति बढ़िया
जीव विशेषज्ञों के मुताबिक अभी भारत आए चीतों के लिए ऊंचाई वाले इलाके, तटीय और पूर्वोत्तर क्षेत्र अनुकूल नहीं हैं। उनके लिए मैदानी इलाकों को ही सही माना जाता है। इस वजह से एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और यूपी में 10 जगहों का निरीक्षण किया गया। जिसमें एमपी का कूनो नेशनल पार्क सभी उम्मीदों पर खरा उतरा। अभी फिलहाल कूनो में 21 चीतों के रहने की जगह हैं, लेकिन अगर सही से मैनेजमेंट कर दिया जाए, तो वहां पर अधिकतम 36 चीते रह सकते हैं। ऐसे में चीतों का नया घर बनाने के लिए अच्छी खासी जगह मिल गई है।

तेंदुए ना करें दिक्कत
कूनो नेशनल पार्क में बाघ, शेर अच्छी संख्या में पाए जाते हैं, लेकिन यहां सबसे ज्यादा तेंदुओं की आबादी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रति 100 वर्ग किलोमीटर में करीब 9 तेंदुए पाए जाते हैं। वन जीव विशेषज्ञों के मुताबिक चीते की रफ्तार तो सबसे तेज है, लेकिन जब भी उनका सामना तेंदुए से होता है, वो कमजोर पड़ जाते हैं। कई बार तो तेंदुओं को चीतों पर हमला करते हुए भी देखा गया है। ऐसे में चीतों की उनसे रक्षा करनी होगी।












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