कुमार विश्वास के दुश्मन नंबर वन को प्रमोट कर रहे हैं केजरीवाल? क्या है नई चाल?
जिस तरीके से कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल की नीतियों और बयानों पर सवाल उठाया था जाहिर है अरविंद केजरीवाल को अच्छा नहीं लगा होगा। लेकिन समय की नजाकत को देखते हुए केजरीवाल सब कुछ मैनेज किया था।
नई दिल्ली। एमसीडी चुनाव में मिली हार के बाद कहा जा रहा था कि आम आदमी पार्टी का बिखराव तय है लेकिन अचानक से अरविंद केजरीवाल सामने आए और कुमार विश्वास को छोटा भाई कहते हुए मना लिया और अमानतुल्ला खान को पार्टी से निलंबित कर दिया। जिसके बाद सबको लगने लगा कि अब कुमार और केजरीवाल के बीच सबकुछ ठीक हो गया है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अमानतुल्ला खान को विधानसभा की 6 प्रमुख समितियों में जगह दी गई है। वहीं कुमार विश्वास के समर्थकों का विधानसभा की समितियों से पत्ता कट गया है अगर किसी समिति में जगह कुछ मिले भी है तो बस नाम के हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है, क्या केजरीवाल कुमार को फिनिश करना चाहते हैं? क्या कुमार और केजरीवाल के बीच का 'विश्वास' खत्म हो गया है? ऐसे तमाम सवाल राजनीतिक गलियारों में घुम रहे हैं और कई तरह के जवाब भी सामने आ रहे हैं।

कुमार विश्वास को फिनिश करना चाहते हैं अरविंद केजरीवाल?
जिस तरीके से कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल की नीतियों और बयानों पर सवाल उठाया था जाहिर है अरविंद केजरीवाल को अच्छा नहीं लगा होगा। लेकिन समय की नजाकत को देखते हुए केजरीवाल, कुमार विश्वास को मनाने उनके घर गए थे और सबकुछ मैनेज कर लिया था। लेकिन सभी जानते है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कभी नहीं चाहेंगे कि आम आदमी पार्टी में कोई उनके बराबर के कद का नेता बन पाए या फिर खड़ा हो पाए।

AAP के संयोजक बनना चाहते थे कुमार
ऐसे दावे किए जा रहे थे कि एमसीडी चुनाव में हार के बाद कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी का संयोजक बनाया जाएगा। हालांकि कुमार विश्वास ने इस पर खुल कर कोई बात नहीं की थी लेकिन कुमार के समर्थक विधायक इस पर बातें जरुर कर रहे थे। पार्टी में कुमार के समर्थक विधायक भी है ऐसे में अरविंद केजरीवाल नहीं चाहेंगे की कुमार का कद आम आदमी पार्टी में इतना बढ़ जाए कि वो (कुमार विश्वास) सीधे तौर पर उनको (अरविंद केजरीवाल ) को चैलेंज कर पाए।

AAP के अंदर पॉलिटिक्स कर रहे हैं केजरीवाल
जब से अमानतुल्ला खान और कुमार विश्वास आमने सामने आए हैं तभी से केजरीवाल ने पार्टी के अंदर पॉलिटिक्स शुरू कर दी है। अगर कुमार विश्वास और अमानतुल्ला खान आपस में लड़ेगे तो कम से कम केजरीवाल के खिलाफ कोई मोर्चा लामबंद नहीं हो पाएगा। साथ ही जो रुतबा कुमार विश्वास का अभी पार्टी में है वो भी कम होगा। केजरीवाल कभी इनको तो कभी उनको समझा बुझा कर गाड़ी को आगे ले जाना चाहते हैं।

विश्वास समर्थकों को सबसे कम महत्व की कमेटी में मिली जगह
कुमार विश्वास का समर्थन करनेवाले विधायकों अलका लांबा, सोमनाथ भारती, भावना गौड़, आदर्श शास्त्री को सबसे कम महत्व वाली लाइब्रेरी कमेटी में सदस्य बनाया गया है. इन कमेटियों की लिस्ट चार मई को तैयार की गयी. ये कमेटियां एक साल के लिए बनायी जाती हैं. दिल्ली विधानसभा में 21 कमेटियां बनती हैं. तीन कमेटियों का चुनाव विधायक करते हैं और 18 कमेटियों के नाम विधानसभा तय करती हैं।
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